
सिंगापुर। भारत की रक्षा निर्माण क्षमता और बढ़ती वैश्विक पहुंच को रेखांकित करते हुए रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने शनिवार को कहा कि वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल सौदा पहले ही हो चुका है, जबकि इंडोनेशिया के साथ इसी तरह का समझौता अंतिम चरण में है।
सिंगापुर में आयोजित शांगरी-ला डायलॉग के इतर एक कार्यक्रम में वियतनामी प्रतिनिधि के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि भारत मित्र देशों के साथ उन्नत रक्षा तकनीक साझा करने को तैयार है। उनके मुताबिक, वियतनाम और इंडोनेशिया दोनों के साथ बातचीत अब अंतिम पड़ाव पर है।
उन्होंने यह भी बताया कि फिलीपींस भारत और रूस के संयुक्त रूप से निर्मित सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस को खरीदने वाला पहला देश बना था। भारत ने फिलीपींस को इस मिसाइल की पहली खेप 2024 में सौंपी थी, जबकि दूसरी खेप अप्रैल 2025 में भेजी गई।
रक्षा सचिव ने कहा कि भारत की ओर से आसियान देशों के साथ सहयोग को बेहद महत्व दिया जा रहा है और इन देशों को भारत मित्र राष्ट्रों की श्रेणी में देखता है, जिनके साथ उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी साझा की जा सकती है।
इससे पहले इसी महीने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हनोई का दौरा किया था, जहां उन्होंने अपने वियतनामी समकक्ष जनरल फान वान गियांग के साथ रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग, प्रशिक्षण और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की थी।
यह यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के 10 वर्ष पूरे होने के मौके पर हुई। हाल ही में वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा के दौरान इस साझेदारी को और आगे बढ़ाकर ‘उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा दिया गया था।
अपनी यात्रा के दौरान राजनाथ सिंह ने वियतनाम के राष्ट्रपति से भी मुलाकात की थी और दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई थी।
रक्षा मंत्री ने बाद में एक्स पर लिखा था कि भारत और वियतनाम के बीच भरोसे, साझा मूल्यों और सहयोग पर आधारित मजबूत संबंध हैं।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे भारत का रक्षा निर्यात बढ़ रहा है, वैसे-वैसे वह उन क्षेत्रों में अपनी रणनीतिक मौजूदगी भी मजबूत करना चाहता है, जो उसके भू-राजनीतिक और सुरक्षा हितों से जुड़े हैं।
With inputs from IANS