
दोहा। कतर ने सोमवार को यरुशलम स्थित Al-Aqsa Mosque परिसर में इजरायली चरमपंथी बसने वालों (सेटलर्स) के प्रवेश और उनकी गतिविधियों की कड़ी निंदा की। कतर ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन और दुनिया भर के करोड़ों मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम बताया।
कतर के विदेश मंत्रालय ने जारी बयान में कहा कि अल-अक्सा मस्जिद केवल मुसलमानों का इबादतगाह (पूजा स्थल) है और यरुशलम तथा उसके पवित्र स्थलों की ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति को बदलने की किसी भी एकतरफा कोशिश को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अमान्य माना जाएगा।
मंत्रालय ने कहा, “इजरायली सुरक्षा बलों के संरक्षण में चरमपंथी तत्वों द्वारा अल-अक्सा मस्जिद में प्रवेश और उकसावे वाली गतिविधियां न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि यह दुनिया भर के मुसलमानों की भावनाओं को भड़काने वाला कदम भी है। यह कब्जे वाले यरुशलम और उसके इस्लामी एवं ईसाई पवित्र स्थलों की मौजूदा स्थिति को बदलने की खतरनाक कोशिश है।”
क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की चेतावनी
कतर ने चेतावनी दी कि इस तरह की घटनाओं और बार-बार होने वाले उकसावे से क्षेत्र में हिंसा और तनाव और बढ़ सकता है, जिससे शांति और स्थिरता की संभावनाओं को नुकसान पहुंचेगा।
विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि इजरायल को एक कब्जाधारी शक्ति के रूप में फिलिस्तीनी लोगों और उनके धार्मिक स्थलों के खिलाफ जारी उल्लंघनों को रोकने तथा अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों का पालन करने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए।
फिलिस्तीन के समर्थन को दोहराया
कतर ने एक बार फिर फिलिस्तीनी मुद्दे के प्रति अपना समर्थन दोहराते हुए कहा कि वह ऐसे समाधान का समर्थन करता है, जिसमें कब्जे का अंत हो और फिलिस्तीनी जनता को उनके वैध अधिकार मिलें। इनमें 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना और East Jerusalem को उसकी राजधानी बनाना शामिल है।
क्या हुआ था?
रिपोर्टों के अनुसार, कुछ इजरायली सेटलर्स ने Dome of the Rock की ओर जाने वाली सीढ़ियों पर इजरायली झंडे लहराए और पुलिस सुरक्षा के बीच राष्ट्रीय गान भी गाया। ये लोग अल-मग़रिबा गेट के रास्ते परिसर में दाखिल हुए, जो इजरायली प्रशासन के नियंत्रण में है।
गौरतलब है कि East Jerusalem पर 1967 में इजरायली कब्जे के बाद से अल-अक्सा मस्जिद परिसर को लेकर कई बार तनाव और झड़पें देखने को मिली हैं। इस धार्मिक परिसर का प्रशासन Jordanian Ministry of Awqaf के पास है, जिसे परिसर के प्रबंधन और प्रवेश नियंत्रण का अधिकार प्राप्त है।
जॉर्डन ने भी हालिया घटनाओं पर चिंता जताते हुए चेतावनी दी है कि पवित्र स्थल की मौजूदा व्यवस्था को बदलने या उसे समय और स्थान के आधार पर विभाजित करने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
With inputs from IANS