




हवाना: अमेरिका द्वारा क्यूबा पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों (एम्बार्गो) ने देश में गंभीर मानवीय संकट पैदा कर दिया है और यह उसके सामाजिक विकास में सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरा है। यह दावा एक नई रिपोर्ट में किया गया है, जिसका हवाला क्यूबा के समाचार पोर्टल *क्यूबाडेबेट* ने दिया है।
सेंटर फॉर इकोनॉमिक एंड पॉलिसी रिसर्च (CEPR) की रिपोर्ट के अनुसार, क्यूबा में शिशु मृत्यु दर वर्ष 2018 में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 4 थी, जो 2025 में बढ़कर 9.9 हो गई। यानी इसमें लगभग 148 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि शिशु मृत्यु दर में यह तेज बढ़ोतरी मुख्य रूप से उन कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों का परिणाम हो सकती है, जिन्हें 2017 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान और सख्त किया गया था।

क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज और उप स्वास्थ्य मंत्री कारिल्दा पेना सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने हाल के महीनों में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों की खुलकर आलोचना की है। उन्होंने विशेष रूप से इस वर्ष 29 जनवरी और 1 मई को जारी अमेरिकी कार्यकारी आदेशों को जिम्मेदार ठहराया है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, तेल आपूर्ति पर अमेरिकी प्रतिबंध और आर्थिक पाबंदियों के कड़े होने के बाद क्यूबा में कैंसर से पीड़ित बच्चों की जीवित रहने की दर 85 प्रतिशत से घटकर 65 प्रतिशत रह गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, हवाना सरकार इन प्रतिबंधों को "सामूहिक दंड" मानती है। इनका असर 1 लाख से अधिक ऐसे मरीजों पर पड़ा है जो सर्जरी का इंतजार कर रहे हैं। इनमें 5,152 कैंसर रोगी और करीब 12,000 बच्चे शामिल हैं।
क्यूबा के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी बताया है कि हीमोडायलिसिस करा रहे 2,888 मरीजों के उपचार पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है, क्योंकि उपचार के लिए जरूरी उपकरणों, पानी और अन्य सामग्री की उपलब्धता प्रभावित हुई है।


प्रतिबंधों के कारण क्यूबा के लिए वैक्सीन, आवश्यक दवाओं और कैंसर जैसी बीमारियों की जांच में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के उत्पादन हेतु जरूरी कच्चा माल, मशीनरी और वित्तीय संसाधन जुटाना कठिन हो गया है।
तेल आपूर्ति में कमी ने क्यूबा के ऊर्जा संकट को और गहरा कर दिया है। राजधानी हवाना सहित कई क्षेत्रों में 20 घंटे से अधिक की बिजली कटौती हो रही है, जबकि प्रतिदिन लगभग 2,000 मेगावाट बिजली की कमी दर्ज की जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2026 में अब तक क्यूबा को केवल एक बार ईंधन की खेप मिली है। रूस के टैंकर "अनातोली कोलोडकिन" द्वारा 1 लाख टन कच्चे तेल की आपूर्ति की गई थी।
ईंधन संकट के कारण उत्पादन केंद्रों से शहरों तक परिवहन बाधित हुआ है, जिससे 1 लाख से अधिक बच्चों को सरकार द्वारा सब्सिडी पर उपलब्ध कराया जाने वाला दूध नहीं मिल पा रहा है।
इसके अलावा, 63 लाख डॉलर मूल्य की आवश्यक वस्तुओं से भरे 170 कंटेनर भी देशभर में वितरित नहीं किए जा सके हैं।
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP), यूनिसेफ (UNICEF) और विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) जैसी अंतरराष्ट्रीय मानवीय संस्थाओं ने भी क्यूबा में खाद्य सहायता पहुंचाने में आ रही कठिनाइयों की जानकारी दी है।
With inputs from IANS
