




नई दिल्ली: फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब पिछले करीब 16 महीनों से दोनों देशों के रिश्तों में कई मुद्दों को लेकर तनाव देखने को मिला था। हालांकि इस बार भले ही दोनों नेताओं के चर्चित गर्मजोशी भरे 'बेयर हग' देखने को नहीं मिले, लेकिन मंच पर एक-दूसरे का हाथ थामकर सहयोग का संदेश जरूर दिखाई दिया।
इस मुलाकात को भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। दोनों देश फिलहाल एक अंतरिम व्यापार समझौते (इंटरिम ट्रेड एग्रीमेंट) को अंतिम रूप देने के करीब हैं, जो द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को नई दिशा दे सकता है।
पिछले डेढ़ साल के दौरान दोनों देशों के बीच आयात शुल्क (टैरिफ), आव्रजन नीतियों, रूस से भारत के संबंधों, पाकिस्तान को लेकर अमेरिकी रुख और प्रतिबंधों जैसे कई मुद्दों पर मतभेद उभरकर सामने आए। इसके अलावा अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत ने भी रिश्तों में तनाव बढ़ाया।

इन चुनौतियों के बावजूद दोनों देश ऊर्जा क्षेत्र को आपसी सहयोग का मजबूत आधार बना रहे हैं। हाइड्रोकार्बन, स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाकर वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
हाल ही में यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल (USIBC) और ग्रांट थॉर्नटन भारत की संयुक्त रिपोर्ट **'स्ट्रेंथनिंग द इंडिया-यूएस एनर्जी पार्टनरशिप'** में भी कहा गया कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा संबंध अब केवल खरीदार और विक्रेता तक सीमित नहीं रहे, बल्कि निवेश, तकनीक, बुनियादी ढांचे और ऊर्जा सुरक्षा पर आधारित रणनीतिक साझेदारी का रूप ले रहे हैं।
स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देश रणनीतिक स्वच्छ ऊर्जा साझेदारी (SCEP) के तहत हरित हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण, नवीकरणीय ऊर्जा और सतत विमानन ईंधन जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। भारतीय रेलवे के वर्ष 2030 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य में भी अमेरिकी सहयोग महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
व्यापार मोर्चे पर भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर इस महीने अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच अब केवल कुछ ही मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की पिछली मुलाकात फरवरी 2025 में हुई थी। इसके बाद दोनों देशों के संबंधों में कई उतार-चढ़ाव आए। ओमान के पास अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा भी प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप के सामने उठाया।
भारत जहां अमेरिकी टैरिफ में राहत और व्यापार समझौते को आगे बढ़ाना चाहता है, वहीं अमेरिका भारतीय बाजार में अपने उत्पादों के लिए अधिक पहुंच की मांग कर रहा है।
2018 से अमेरिका द्वारा भारतीय इस्पात, एल्युमीनियम और अन्य उत्पादों पर लगाए गए शुल्कों ने व्यापार को प्रभावित किया। वहीं 2025 में रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत तक जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की थी। इसी दौरान एच-1बी वीजा नियमों को सख्त किए जाने से बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर भी प्रभावित हुए।


फरवरी में हुए अंतरिम व्यापार समझौते के तहत भारत ने अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों, विशेष रूप से ज्वार, सोयाबीन तेल और वाइन पर शुल्क घटाने पर सहमति जताई। बदले में अमेरिका ने भारतीय वस्त्र, चमड़ा, रसायन और मशीनरी पर 18 प्रतिशत शुल्क तय किया, जबकि अंतिम समझौते के बाद दवाओं, रत्न-आभूषण और विमान के पुर्जों पर शुल्क समाप्त करने की योजना है।
दोनों देश व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) पर भी बातचीत कर रहे हैं, जिसमें सप्लाई चेन, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) उत्पादों और मेडिकल उपकरणों को शामिल किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि मतभेदों के बावजूद भारत और अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग, तकनीकी विकास और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों की साझेदारी भविष्य में और गहरी हो सकती है। फ्रांस में हुई यह मुलाकात इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
With inputs from IANS
