




वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति **डोनाल्ड ट्रंप** ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता मिली है। उन्होंने बताया कि फ्रांस के ऐतिहासिक **वर्साय पैलेस** में अमेरिका-ईरान के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच शत्रुता कम करना और **हॉर्मुज जलडमरूमध्य** को फिर से सामान्य समुद्री यातायात के लिए खोलना है।
पेरिस पहुंचने के बाद पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने संकेत दिया था कि समझौता जल्द अंतिम रूप ले लेगा। जब उनसे पूछा गया कि इस पर हस्ताक्षर कब होंगे, तो उन्होंने जवाब दिया, **"करीब 48 घंटे।"** हालांकि, कुछ ही घंटों बाद फ्रांसीसी राष्ट्रपति **इमैनुएल मैक्रों** द्वारा आयोजित रात्रिभोज के बाद वर्साय से बाहर निकलते हुए ट्रंप ने पुष्टि की कि समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं।

उन्होंने कहा, **"इस पर हस्ताक्षर हो गए हैं। मैंने वर्साय में इस पर हस्ताक्षर किए हैं।"**
ट्रंप के अनुसार, यह समझौता अमेरिका और ईरान के बीच आगे की वार्ताओं के लिए आधार तैयार करेगा। साथ ही, खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम करने और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य नौवहन बहाल करने का रास्ता खोलेगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे क्षेत्रीय शांति और वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना कुछ समय तक खाड़ी क्षेत्र में तैनात रहेगी ताकि समझौते के क्रियान्वयन पर नजर रखी जा सके।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पूछे गए सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा कि सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके। उन्होंने कहा कि मौजूदा परमाणु सामग्री से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि भविष्य में ईरान के पास परमाणु हथियार न हों।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि व्यापक समझौते के लिए प्रस्तावित 60 दिन की समय-सीमा को लेकर वह बहुत सख्त नहीं हैं। उनके मुताबिक, जब तक ईरान समझौते का पालन करता रहेगा, समय-सीमा ज्यादा मायने नहीं रखती।
हालांकि, ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ईरान समझौते का पालन नहीं करता है तो सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, **"अगर वे समझौते पर अमल नहीं करते हैं, तो आप इसे जो भी नाम देना चाहें दे सकते हैं, लेकिन ऐसी कार्रवाई संभव है।"**
बैलिस्टिक मिसाइलों के मुद्दे पर ट्रंप ने कहा कि यदि क्षेत्र के अन्य देशों के पास ऐसी मिसाइलें हैं, तो सीमित संख्या में ईरान के पास भी उनका होना पूरी तरह अनुचित नहीं माना जा सकता। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु हथियार दो अलग-अलग विषय हैं।


फ्रांस में वैश्विक सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा से जुड़े मुद्दों पर आयोजित बैठकों के दौरान ट्रंप ने यूक्रेन-रूस युद्ध पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि रूस की सैन्य ताकत अधिक होने के बावजूद यूक्रेन अब भी मजबूती से मुकाबला कर रहा है।
रूस पर प्रतिबंधों के संबंध में उन्होंने कहा कि यदि परिस्थितियां बनीं तो अमेरिका दोबारा प्रतिबंध लगाने पर विचार कर सकता है। ट्रंप ने कहा कि तेल की कीमतों में आई गिरावट के बाद इस विकल्प पर फिर से विचार किया जा सकता है।
ट्रंप ने पूरे दिन इस समझौते का बचाव करते हुए इसे वैश्विक बाजारों, ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया में स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
With inputs from IANS
