





नई दिल्ली: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में जारी विरोध प्रदर्शन लगातार उग्र होते जा रहे हैं। एक ओर प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, तो दूसरी ओर पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां सख्त कार्रवाई कर रही हैं। इस बीच, पीओके में हो रही घटनाओं पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की चुप्पी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर के निर्देश के बाद सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त अभियान शुरू किया है। बताया जा रहा है कि अब तक करीब 1,500 लोगों को आतंकवाद निरोधक कानूनों के तहत गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोप हैं कि महिलाओं और बच्चों पर भी गोलीबारी की गई, जबकि मारे गए लोगों के शव उनके परिजनों को नहीं सौंपे जा रहे हैं।


अधिकारियों का कहना है कि पीओके में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। उनका आरोप है कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर अक्सर मुखर रहने वाले कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।
पीओके में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व संयुक्त आवामी एक्शन कमेटी (JAAC) कर रही है, जिसमें व्यापारी, वकील और नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल हैं। संगठन आर्थिक राहत, राजनीतिक अधिकारों और सरकारी खर्चों में कटौती जैसी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक, पहले सरकार ने JAAC से बातचीत का आश्वासन दिया, लेकिन 5 जून को इसी संगठन पर आतंकवाद निरोधक कानून के तहत प्रतिबंध लगा दिया गया। इसके बाद इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी गईं तथा स्थानीय टीवी चैनलों का प्रसारण भी रोक दिया गया।
रिपोर्टों के अनुसार, कानून-व्यवस्था संभाल रही स्थानीय पुलिस की जगह पंजाब रेंजर्स की तैनाती की गई। 7 और 8 जून को रावलाकोट में प्रदर्शनकारियों पर हुई गोलीबारी में लगभग 30 नागरिकों के मारे जाने का दावा किया गया है।


इन्फो-वॉर और साइकोलॉजिकल वॉरफेयर पर शोध करने वाले समूह 'डिसइन्फो लैब' ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई पोस्ट साझा कर अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंकों, गैर-सरकारी संगठनों और कश्मीरी मुद्दों पर सक्रिय मंचों की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। समूह का दावा है कि ये संगठन जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर नियमित प्रतिक्रिया देते हैं, लेकिन पीओके में हुई हिंसा पर उन्होंने कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ अंतरराष्ट्रीय मंच और संगठन लंबे समय से जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं, लेकिन पीओके में हो रही घटनाओं पर उन्होंने कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी। अधिकारियों का आरोप है कि इन संगठनों का फोकस मुख्य रूप से भारत के खिलाफ कथित मानवाधिकार मुद्दों को उठाने तक सीमित रहा है।
हालांकि, इन सभी आरोपों और दावों पर संबंधित अंतरराष्ट्रीय संगठनों या पाकिस्तान सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। साथ ही, पीओके में कथित मौतों, गिरफ्तारियों और मानवाधिकार उल्लंघनों से जुड़े कई दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
With inputs from IANS
