एफबीआई का दावा: पंजाब से शुरू हुआ गैंग पांच महाद्वीपों तक फैला, हत्या से लेकर ड्रग्स तस्करी तक फैला आपराधिक नेटवर्कBy Admin Fri, 17 July 2026 12:46 PM

वॉशिंगटन। अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी एफबीआई की ओर से दायर एक विस्तृत अभियोग (इंडाइटमेंट) में दावा किया गया है कि पंजाब से शुरू हुआ एक आपराधिक गिरोह समय के साथ एक अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध सिंडिकेट में बदल गया, जिसके दुनिया के पांच महाद्वीपों में 1,000 से अधिक सदस्य और सहयोगी सक्रिय हैं। आरोप है कि यह नेटवर्क हत्या, अपहरण, मादक पदार्थों की तस्करी, रंगदारी, हथियारों की तस्करी, धन शोधन और मानव तस्करी जैसे अपराधों के जरिए करोड़ों डॉलर की अवैध कमाई करता था।

आईएएनएस को प्राप्त 44 पृष्ठों के अभियोग में अमेरिकी अधिकारियों ने विस्तार से बताया है कि पंजाब से शुरू हुआ यह कथित आपराधिक नेटवर्क किस तरह उत्तर अमेरिका, यूरोप और ओशिनिया सहित कई देशों तक फैल गया।

कैलिफोर्निया के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की अमेरिकी जिला अदालत में दायर इस अभियोग में 15 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें कथित सरगना जग्गू भगवानपुरिया और भारतीय नागरिक नितीश कौशल शामिल हैं। नितीश कौशल को एफबीआई ने इस सप्ताह अपनी 'मोस्ट वांटेड' सूची में शामिल करने के बाद शुक्रवार को अमेरिकी राज्य वर्मोंट से गिरफ्तार किया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 'जग्गू भगवानपुरिया ऑर्गनाइज्ड क्राइम ग्रुप' की शुरुआत पंजाब में जग्गू भगवानपुरिया के नेतृत्व में हुई थी। बताया गया है कि वह पहले जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से जुड़ा था, लेकिन बाद में उसने अपना अलग आपराधिक नेटवर्क खड़ा कर लिया, जो आगे चलकर प्रतिद्वंद्वी संगठन बन गया।

अभियोग में आरोप लगाया गया है कि क्षेत्रीय स्तर पर सक्रिय यह गिरोह बाद में भारत मुख्यालय वाला एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक सिंडिकेट बन गया, जिसके सदस्य और सहयोगी अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड तक फैले हुए हैं।

अमेरिकी अभियोजकों का दावा है कि संगठन के दुनिया भर में 1,000 से अधिक सदस्य और सहयोगी हैं, जिनमें से 100 से अधिक अमेरिका में सक्रिय हैं।

अभियोग के अनुसार, संगठन के सदस्य हत्या, सुपारी लेकर हत्या, अपहरण, मादक पदार्थों की तस्करी, रंगदारी, हथियारों की तस्करी, धन शोधन और मानव तस्करी जैसी गतिविधियों में शामिल थे। आरोप है कि गिरोह अपने आपराधिक कारोबार की सुरक्षा, विरोधियों को खत्म करने, संगठन से गद्दारी करने वालों को सजा देने और रंगदारी के लिए लोगों को डराने-धमकाने के लिए हिंसा का इस्तेमाल करता था। अभियोजन पक्ष का यह भी कहना है कि संगठन सोशल मीडिया पर हिंसक घटनाओं की जिम्मेदारी लेकर अपना प्रभाव और भय बढ़ाने की कोशिश करता था।

अभियोग में यह भी आरोप लगाया गया है कि संगठन पंजाब के आर्थिक रूप से कमजोर और संवेदनशील युवाओं, यहां तक कि नाबालिगों को भी अपने साथ जोड़ता था, क्योंकि पकड़े जाने पर उन्हें अपेक्षाकृत कम कानूनी सजा मिलने की संभावना रहती थी। भर्ती करने वाले कथित तौर पर युवाओं को पैसे, पहचान, प्रभाव और छात्र या कार्य वीजा के माध्यम से विदेश भेजने का लालच देते थे।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, कुछ मामलों में हत्या करने के बदले युवाओं को मात्र 20,000 रुपये तक दिए जाते थे। संगठन के प्रति वफादार रहने वालों को बाद में अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में काम करने के लिए भेजा जाता था।

अभियोग में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि जग्गू भगवानपुरिया अमेरिका में कोकीन, मेथामफेटामिन और अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी के मार्गों का संचालन करता था। दक्षिणी कैलिफोर्निया से नशीले पदार्थ एकत्र कर ट्रकों के माध्यम से अमेरिका के विभिन्न हिस्सों और कनाडा सीमा तक पहुंचाए जाते थे। एक सामान्य खेप में 100 किलोग्राम या उससे अधिक कोकीन या मेथामफेटामिन होने का दावा किया गया है।

अभियोजन पक्ष का यह भी आरोप है कि संगठन प्रतिद्वंद्वी तस्करी गिरोहों से कोकीन लूटता था और अपने मादक पदार्थों की खेप चोरी करने वालों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई करता था। साथ ही, संगठन कथित तौर पर सुपारी लेकर हत्या करने का काम भी करता था और उससे होने वाली कमाई का एक हिस्सा नेतृत्व तक पहुंचाया जाता था।

रंगदारी से जुड़े आरोपों में कहा गया है कि गिरोह अपने निशाने पर आने वाले लोगों और उनके भारत में रहने वाले परिजनों की जानकारी जुटाता था। इसके बाद एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप के जरिए धमकी देकर पैसे की मांग की जाती थी।

अभियोग में यह भी आरोप लगाया गया है कि पंजाब में कुछ भ्रष्ट कानून प्रवर्तन अधिकारियों की मदद से झूठे आपराधिक मामले दर्ज कराए जाते थे। बाद में पीड़ितों या उनके परिजनों से पैसे लेकर उन मामलों को हटाने या समाप्त कराने की पेशकश की जाती थी।

अभियोग में पंजाब पुलिस के अधिकारी गुरिंदरजीत सिंह का नाम भी लिया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने संगठन के सदस्यों की मदद करते हुए कुछ लोगों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज कराए और बाद में पैसे लेकर उनके नाम हटाने की कोशिश की। हालांकि, इन आरोपों की अभी अदालत में पुष्टि नहीं हुई है और इन पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

अमेरिकी अभियोजकों ने यह भी आरोप लगाया है कि संगठन ने हथियारों की तस्करी का नेटवर्क भी विकसित किया था। इसके तहत नेवादा में फर्जी खरीदारों के माध्यम से हथियार और गोला-बारूद खरीदे जाते थे और बाद में उन्हें अमेरिका में बेचा जाता था या कनाडा में तस्करी कर भेजा जाता था।

अभियोग के अनुसार, जग्गू भगवानपुरिया भारत की जेल में बंद रहने के बावजूद अवैध मोबाइल फोन और इंटरनेट आधारित संचार माध्यमों के जरिए अपने नेटवर्क का संचालन करता रहा। आरोप है कि वह जेल से ही ड्रग्स तस्करी, रंगदारी और विदेशों में सक्रिय सहयोगियों द्वारा की जाने वाली हिंसक गतिविधियों का संचालन करता था।

अभियोजन पक्ष का दावा है कि संगठन छोड़ना भी आसान नहीं था। जो सदस्य संगठन के प्रति वफादार नहीं माने जाते थे, उन्हें या भारत में रहने वाले उनके परिजनों को हिंसक परिणाम भुगतने की धमकी दी जाती थी।

अस्वीकरण: यह सभी आरोप अमेरिकी संघीय अभियोजकों द्वारा अदालत में दायर अभियोग में लगाए गए हैं। इन आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा और फिलहाल इन्हें अदालत में सिद्ध किया जाना बाकी है।

 

With inputs from IANS