पीओके चुनाव हिंसा और धांधली के आरोपों में घिरे, पाकिस्तान सेना की भूमिका पर उठे सवालBy Admin Thu, 30 July 2026 12:42 PM

नई दिल्ली। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में जारी चुनाव हिंसा, चुनावी धांधली के आरोपों और कथित जबरन गुमशुदगी की घटनाओं के कारण विवादों में घिर गए हैं। विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही जॉइंट एक्शन अवामी कमेटी (जेएएसी) ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान लोगों से लगातार शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है।

जेएएसी की अपील के बावजूद पीओके के कई इलाकों से हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि संगठन का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण रहने की कोशिश की और अशांति स्थानीय लोगों की ओर से नहीं फैलाई गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, एक खुफिया अधिकारी ने दावा किया कि क्षेत्र से मिले इनपुट के अनुसार हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों को प्रदर्शन में घुसपैठ करने के निर्देश दिए गए थे। आरोप है कि उनका उद्देश्य प्रदर्शनकारियों के बीच शामिल होकर हिंसा भड़काना और फिर वहां से निकल जाना था, ताकि अशांति के लिए आंदोलनकारियों को जिम्मेदार ठहराया जा सके।

अधिकारी के अनुसार, कथित तौर पर आतंकियों और किराए के गुंडों द्वारा की गई हिंसा को सुरक्षा एजेंसियों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग का आधार बनाया। बताया गया कि अधिकांश प्रदर्शनकारियों को यह तक समझ नहीं आया कि उन पर बल प्रयोग क्यों किया जा रहा है। पिछले तीन दिनों में करीब 37 लोगों की मौत और लगभग 200 लोगों के घायल होने की सूचना है।

रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तान सेना ने पीओके में ऐसा तंत्र विकसित किया है, जिसके जरिए हिंसा भड़काकर आंदोलन को दबाने की कोशिश की जा रही है। कहा गया है कि कई महीनों से जारी विरोध प्रदर्शनों को समाप्त कराने के लिए लोगों की मांगों पर ध्यान देने के बजाय बल प्रयोग का रास्ता अपनाया जा रहा है।

एक अन्य अधिकारी के हवाले से दावा किया गया है कि हाल ही में पीओके सेक्टर कमांडर को सेना के शीर्ष अधिकारियों ने अधिकतम बल प्रयोग करने के निर्देश दिए। साथ ही, कथित तौर पर कुछ गुंडों और आतंकियों को प्रदर्शन स्थलों पर भेजकर हिंसा फैलाने और बाद में उन्हें सुरक्षित निकालने की योजना बनाई गई, ताकि वास्तविक स्थिति सामने न आ सके।

रिपोर्ट के अनुसार, इन तत्वों ने सरकारी वाहनों और इमारतों को नुकसान पहुंचाया, पथराव किया और यहां तक कि गोलीबारी भी की, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों पर हिंसक होने का आरोप लगाया गया।

जेएएसी ने लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा है कि आंदोलन में घुसपैठ की ऐसी कोशिशें आगे भी हो सकती हैं। संगठन ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा।

अधिकारियों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में पीओके की स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में किसी भी राजनीतिक दल के लिए प्रभावी ढंग से शासन करना चुनौतीपूर्ण होगा। उनका यह भी दावा है कि यदि चुनाव में बढ़त बनाए हुए पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) सरकार बनाती भी है, तो उसे जनता का व्यापक समर्थन मिलना मुश्किल होगा, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग मानते हैं कि चुनावी प्रक्रिया में पाकिस्तान सेना की भूमिका रही है।

इन घटनाक्रमों से केंद्र में सहयोगी दल पीएमएल-एन और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के बीच मतभेद भी बढ़ने की बात कही जा रही है।

गौरतलब है कि पीओके में लोग लंबे समय से बिजली दरों में कमी, खाद्य सब्सिडी, बेहतर जीवन सुविधाओं और सरकारी अधिकारियों एवं मंत्रियों को मिलने वाली विशेष सुविधाओं को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं।

पीओके में मतदान 27 जुलाई से 10 अगस्त के बीच तीन चरणों में हो रहा है। अब तक घोषित नतीजों में पीएमएल-एन ने 13 में से 9 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि शेष सीटें पीपीपी के खाते में गई हैं। इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने चुनाव का बहिष्कार किया है।

53 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 27 सीटों की आवश्यकता होती है। इनमें 45 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं, जबकि आठ सीटें आरक्षित हैं।

 

With inputs from IANS

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