

नई दिल्ली — पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जारी अशांति की कवरेज के बाद अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनल Al Jazeera की वेबसाइट तक पाकिस्तान में पहुंच बाधित किए जाने के दावों ने प्रेस की स्वतंत्रता और इंटरनेट सेंसरशिप को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
सोशल मीडिया पर कई पाकिस्तानी यूजर्स ने दावा किया कि वे अल जज़ीरा की वेबसाइट नहीं खोल पा रहे हैं। उन्होंने इसे स्वतंत्र मीडिया तक लोगों की पहुंच सीमित करने का प्रयास बताते हुए प्रेस की आजादी और निष्पक्ष जानकारी के अधिकार पर चिंता जताई।
ये दावे ऐसे समय सामने आए हैं जब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पिछले कुछ दिनों से विरोध प्रदर्शन और अशांति लगातार बढ़ रही है। कई सोशल मीडिया यूजर्स का मानना है कि वेबसाइट तक पहुंच में कथित बाधा का संबंध अल जज़ीरा द्वारा PoK की स्थिति पर की गई रिपोर्टिंग से हो सकता है।
इससे पहले भी पाकिस्तान के अधिकारियों ने संवेदनशील मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्टिंग को लेकर आलोचना की है। वहीं, अल जज़ीरा खुद को एक स्वतंत्र समाचार संगठन बताता रहा है।
कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान के कुछ वर्ग PoK की घटनाओं की कवरेज से असंतुष्ट थे, जिसके बाद कथित तौर पर यह कदम उठाया गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इस बीच, PoK में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। विभिन्न रिपोर्टों में दावा किया गया है कि प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों में पिछले चार दिनों के दौरान 50 से अधिक लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। हालांकि, इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि पाकिस्तान की ओर से नहीं की गई है।
Joint Awami Action Committee (JAAC) के सदस्य Sardar Umar Nazir Kashmiri ने सोशल मीडिया मंच X पर आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई की, जिसमें 50 से अधिक लोगों की मौत हुई और सैकड़ों घायल हुए।

JAAC ने एक अन्य बयान में कहा कि मुजफ्फराबाद क्षेत्र में देर रात तक प्रदर्शन जारी रहे और लोग अपने मौलिक अधिकारों की सुरक्षा तथा स्थानीय प्रशासन द्वारा किए गए वादों को लागू करने की मांग कर रहे हैं।
इन घटनाओं पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिका स्थित Human Rights Foundation (HRF) ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग की खबरों की निंदा करते हुए पाकिस्तान से कार्रवाई रोकने, संचार सेवाएं बहाल करने और किसी भी अवैध बल प्रयोग की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की है।
HRF ने स्थानीय नागरिक संगठनों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने हजारों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की। हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों और मृतकों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
PoK में जारी अशांति के बीच अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक कथित पहुंच में बाधा और इंटरनेट प्रतिबंधों की खबरों ने पारदर्शिता, प्रेस की स्वतंत्रता और स्वतंत्र सूचना के प्रवाह को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
With inputs from IANS