
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के सुराब जिले में कथित हवाई हमलों में 30 से अधिक नागरिकों के मारे जाने की खबरों के बाद बलूच कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। रिपोर्टों के अनुसार, मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं।
मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने स्थानीय रिपोर्टों के हवाले से दावा किया कि पाकिस्तानी वायुसेना ने सुराब के गिदार इलाके में नागरिक आबादी वाले क्षेत्रों पर कथित तौर पर अंधाधुंध बमबारी की। उन्होंने कहा कि हमलों में कई नागरिकों की मौत हुई और बड़ी संख्या में नागरिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचा।
मीर यार बलूच के अनुसार, प्रभावित इलाके के अस्पतालों को सैन्य कर्मियों ने घेर रखा है और डॉक्टरों तथा चिकित्सा कर्मचारियों पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि घायलों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने के कारण भी कुछ लोगों की जान गई। स्थानीय लोगों के हवाले से उन्होंने यह भी कहा कि इलाके के ऊपर ड्रोन और कोबरा गनशिप हेलीकॉप्टर लगातार गश्त कर रहे हैं।
बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) की केंद्रीय नेता सबीहा बलूच ने भी हमले की निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि बलूच नागरिकों, महिलाओं और बच्चों की हत्या की घटनाएं बेहद गंभीर हैं और इसे उन्होंने "नरसंहार" करार दिया।
सबीहा ने कहा कि प्रभावित क्षेत्र को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने घेर रखा है, जिससे राहत और बचाव दल, चिकित्सा कर्मियों, एंबुलेंस तथा पत्रकारों की पहुंच बाधित हो रही है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से प्रभावित क्षेत्र में तत्काल मानवीय सहायता और स्वतंत्र रिपोर्टिंग की अनुमति सुनिश्चित करने की अपील की।
उन्होंने पत्रकारों, चिकित्सा टीमों और मानवीय संगठनों से भी प्रभावित इलाके तक पहुंच बनाने और घायलों तथा जीवित बचे लोगों तक आवश्यक चिकित्सा सहायता पहुंचाने की मांग उठाने को कहा।
इस बीच, मानवाधिकार संगठन Baloch Voice for Justice (BVJ) ने घटना की तत्काल, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग की है। संगठन ने कहा कि जांच अंतरराष्ट्रीय निगरानी में होनी चाहिए और मारे गए तथा घायल लोगों की पहचान एवं पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
BVJ ने कहा कि नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा राज्य की मूल जिम्मेदारी है और किसी भी सैन्य कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून तथा नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए।
संगठन ने संयुक्त राष्ट्र, उसके मानवाधिकार निकायों, अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के अन्य सदस्यों से बलूचिस्तान में नागरिकों के खिलाफ कथित हिंसा और युद्ध अपराधों के आरोपों पर चुप्पी तोड़ने की अपील की।
मानवाधिकार संगठन के मुताबिक, हिंसा से प्रभावित परिवारों को न्याय, सुरक्षा और अपने प्रियजनों के साथ वास्तव में क्या हुआ इसकी सच्चाई जानने का अधिकार है। उसने चेतावनी दी कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की लगातार चुप्पी ऐसे मामलों में जवाबदेही की कमी को बढ़ावा दे सकती है।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तत्काल उपलब्ध नहीं है। ऐसे में हमलों में मारे गए लोगों की संख्या और घटनाक्रम से जुड़े दावों की स्वतंत्र जांच महत्वपूर्ण होगी।
With inputs from IANS