जापान में ताकाीची सरकार की नीतियों के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन, सैन्य विस्तार और इतिहास को लेकर जताया विरोधBy IANS Thu, 20 August 2026 11:49 AM

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जापान में प्रधानमंत्री साने ताकाीची की सरकार की नीतियों के खिलाफ बुधवार शाम टोक्यो में बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ। नेशनल डाइट बिल्डिंग के सामने जुटे प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर जापान के युद्धकालीन इतिहास को लेकर गलत नजरिया अपनाने और देश को सैन्य विस्तार की दिशा में आगे बढ़ाने का आरोप लगाया।

आयोजकों के मुताबिक, प्रदर्शन में करीब 15,000 लोगों ने व्यक्तिगत रूप से हिस्सा लिया, जबकि लगभग 25,000 लोग ऑनलाइन माध्यम से इससे जुड़े। प्रदर्शन के दौरान एक प्रमुख संदेश था कि जो राजनेता युद्ध और जापान की आक्रामकता के इतिहास पर आत्ममंथन करने से इनकार करते हैं, उन्हें तत्काल पद छोड़ देना चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने “सैन्य विस्तार का विरोध करो” जैसे संदेशों वाले बैनर थामे और जापान के शांतिवादी संविधान की रक्षा की मांग करते हुए नारे लगाए। कई प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री ताकाीची के इस्तीफे की भी मांग की।

जापान की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता मिजुहो फुकुशिमा ने कहा कि 15 अगस्त को युद्ध में मारे गए लोगों की राष्ट्रीय स्मृति सभा में ताकाीची ने जापान के अतीत के आक्रामक युद्धों को लेकर “आत्मचिंतन” का कोई उल्लेख नहीं किया।

फुकुशिमा ने इस महीने की शुरुआत में हिरोशिमा और नागासाकी में परमाणु बम हमलों की बरसी के कार्यक्रमों के दौरान ताकाीची के तीन गैर-परमाणु सिद्धांतों को लेकर दिए गए कथित अस्पष्ट बयानों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा कि जापान इन सिद्धांतों को आगे भी कायम रखेगा। उनके अनुसार, यह बेहद गंभीर मुद्दा है।

दक्षिणी जापानी प्रांत ओकिनावा से प्रदर्शन में पहुंचे कियोमासा कोमेसु ने आरोप लगाया कि ताकाीची सरकार देश को सैन्य विस्तार के रास्ते पर ले जा रही है। उन्होंने कहा कि जापान की मौजूदा नीतियों में उन्हें “आक्रामक रुख” साफ दिखाई देता है।

सकुमा नाम से अपनी पहचान बताने वाले एक अन्य प्रदर्शनकारी ने हाल में सरकार की ओर से उठाए गए कई कदमों का विरोध किया। इनमें राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी की स्थापना की योजना भी शामिल है। उन्होंने चेतावनी दी कि देश में “युद्ध की आहट करीब आती जा रही है।”

कानागावा प्रांत से प्रदर्शन में शामिल होने आई शिक्षिका कोजिमा ने कहा कि वह इस बात को लेकर भी चिंतित हैं कि कुछ सामान्य जापानी कंपनियां ड्रोन और हथियारों जैसे क्षेत्रों में अपने वित्तीय संसाधन और निवेश बढ़ा रही हैं।

ताकाीची सरकार ने हाल के समय में जापान की रक्षा क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया है। इसमें रक्षा खर्च में लगातार वृद्धि, घातक हथियारों के निर्यात पर प्रतिबंधों में ढील, मध्यम और लंबी दूरी की मिसाइलों की तैनाती तथा सैन्य क्षमताओं के विस्तार जैसे कदम शामिल हैं। सरकार जापान के शांतिवादी संविधान में संशोधन की दिशा में भी आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है।

जापान का संविधान, विशेष रूप से उसका अनुच्छेद 9, देश को युद्ध को संप्रभु अधिकार के रूप में इस्तेमाल करने और अंतरराष्ट्रीय विवादों को सैन्य बल के जरिए सुलझाने से रोकता है। इसी वजह से रक्षा नीति में बदलाव को लेकर जापान में लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस चलती रही है।

इस बीच, ताकाीची की ओर से तीन गैर-परमाणु सिद्धांतों को लेकर स्पष्ट रुख नहीं अपनाए जाने से जापान के शांति समर्थक समूहों और नागरिकों की चिंता और बढ़ी है। ये सिद्धांत जापान की परमाणु हथियारों के संबंध में लंबे समय से चली आ रही नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

प्रदर्शन से संकेत मिलता है कि जापान में सुरक्षा और रक्षा नीति में बदलाव को लेकर सरकार को समर्थन के साथ-साथ नागरिक समाज के एक हिस्से से कड़ा विरोध भी झेलना पड़ रहा है।