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पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनिर ने पेशावर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के दौरान आतंकवाद को हराने और देश में स्थायी शांति कायम करने का संकल्प दोहराया है। हालांकि, भारतीय खुफिया अधिकारियों और आतंकवाद मामलों के जानकारों ने उनके इस रुख पर सवाल उठाते हुए लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) को लेकर पाकिस्तान की नीति में कथित विरोधाभास की ओर इशारा किया है।
मुनिर ने 22 सितंबर को पेशावर स्थित कोर मुख्यालय का दौरा किया था, जहां उन्हें खैबर पख्तूनख्वा की मौजूदा सुरक्षा स्थिति, आतंकवाद विरोधी अभियानों, सीमा प्रबंधन और तैनात सैन्य इकाइयों की तैयारियों के बारे में जानकारी दी गई। पाकिस्तान की सैन्य मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के मुताबिक, उन्होंने सुरक्षा बलों को सतर्क रहने और उच्च स्तर की परिचालन तैयारी बनाए रखने का निर्देश दिया।
मुनिर ने कहा कि पाकिस्तानी सशस्त्र बल देश में आतंकवाद को हराने और स्थायी शांति एवं स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में आतंकवादी और उग्रवादी हिंसा की चुनौती बनी हुई है। हाल के दिनों में खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर घातक हमले भी हुए हैं।
भारतीय अधिकारियों का दावा है कि मुनिर का आतंकवाद विरोधी अभियान मुख्य रूप से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे पाकिस्तान विरोधी समूहों तक सीमित दिखाई देता है, जबकि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे भारत-केंद्रित संगठनों के प्रति अलग रवैया अपनाया जा रहा है।
भारतीय खुफिया अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के सैन्य और खुफिया तंत्र के कुछ हिस्सों ने लश्कर और जैश के ढांचे को फिर से खड़ा करने पर ध्यान दिया। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में स्वतंत्र सार्वजनिक पुष्टि सीमित है।
भारतीय अधिकारियों का यह भी दावा है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को वैध संघर्ष के रूप में पेश करने संबंधी पाकिस्तान की टिप्पणियां इस नीति का संकेत देती हैं। इसके विपरीत, पाकिस्तान की आधिकारिक स्थिति यह है कि उसकी सुरक्षा प्राथमिकता देश के भीतर आतंकवाद और उग्रवाद से निपटना है।
बलूचिस्तान में भी हालात जटिल बने हुए हैं। BLA लंबे समय से पाकिस्तानी राज्य के खिलाफ सशस्त्र अभियान चला रहा है। क्षेत्र में संसाधनों के नियंत्रण, विकास और राजस्व के बंटवारे समेत राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों को लेकर असंतोष भी रहा है। पाकिस्तानी सरकार BLA को एक आतंकवादी संगठन मानती है और उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई करती रही है।
खैबर पख्तूनख्वा में TTP की गतिविधियां पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक अलग चुनौती हैं। हालिया हिंसा के बाद पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में मौजूद कथित आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ भी कार्रवाई की है। पाकिस्तान का आरोप है कि TTP को अफगान क्षेत्र से समर्थन और सुरक्षित पनाह मिलती है, जबकि अफगान तालिबान इन आरोपों से इनकार करता है। हालिया सीमा-पार तनाव में नागरिक हताहत होने की रिपोर्टों ने भी दोनों देशों के बीच विवाद को बढ़ाया है। AP News
रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तान के सुरक्षा तंत्र ने कुछ मौकों पर अलग-अलग सशस्त्र समूहों को TTP और BLA के खिलाफ इस्तेमाल करने की संभावना पर विचार किया। ऐसे किसी भी कदम को लेकर आतंकवाद विशेषज्ञों ने क्षेत्रीय सुरक्षा पर संभावित प्रभाव की चिंता जताई है।
इस बीच, पाकिस्तान में जारी आधिकारिक बयानों से यह स्पष्ट है कि मुनिर फिलहाल खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवाद विरोधी अभियानों और सीमा सुरक्षा को प्रमुखता दे रहे हैं। पेशावर यात्रा के दौरान उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मारे गए सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि भी दी।
ऐसे में मुनिर के ताजा बयान और भारत की ओर से लगाए गए आरोप दो अलग-अलग दावों को सामने रखते हैं। एक तरफ पाकिस्तान की सेना TTP और अन्य उग्रवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई का संकल्प दोहरा रही है, वहीं भारत लगातार लश्कर और जैश जैसे संगठनों को लेकर पाकिस्तान की कथित नीति पर सवाल उठाता रहा है। इन दावों और आरोपों के बीच वास्तविक स्थिति का आकलन स्वतंत्र रूप से सत्यापित घटनाक्रम और उपलब्ध सार्वजनिक साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।