यूनुस सरकार के कार्यकाल के अंतिम दिनों में अमेरिका से जल्दबाजी में व्यापार समझौते पर उठे सवालBy IANS Thu, 24 September 2026 05:09 PM

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बांग्लादेश और अमेरिका के बीच हुए Agreement on Reciprocal Trade (ART) को लेकर पूर्व अंतरिम सरकार पर सवाल उठने लगे हैं। ढाका स्थित ‘द डेली स्टार’ में प्रकाशित एक लेख में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन मोहम्मद यूनुस सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में जल्दबाजी में ऐसा समझौता किया, जिसका दायरा काफी व्यापक है और जिसने भविष्य की सरकार के लिए कई प्रतिबद्धताएं तय कर दीं।

बांग्लादेश ने 9 फरवरी 2026 को अमेरिका के साथ यह समझौता किया था। यह राष्ट्रीय चुनाव से महज तीन दिन पहले हुआ था और उस समय देश में यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार सत्ता में थी। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) के अनुसार, यह समझौता दक्षिण एशिया में अमेरिका का पहला Reciprocal Trade Agreement था।

‘द डेली स्टार’ के लेख में कहा गया है कि समझौते पर हस्ताक्षर के समय कोई निर्वाचित संसद इस पर बहस या मंजूरी नहीं दे सकी थी। लेख के मुताबिक, बांग्लादेश ने दक्षिण एशिया के अन्य देशों की तुलना में अपेक्षाकृत तेजी से समझौता किया, जबकि पाकिस्तान और श्रीलंका ने अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखी।

समझौते के तहत अमेरिका ने बांग्लादेशी उत्पादों पर reciprocal tariff को 20 प्रतिशत से घटाकर 19 प्रतिशत किया। इसके बदले बांग्लादेश ने बड़ी संख्या में अमेरिकी उत्पादों के लिए शुल्क और गैर-टैरिफ बाधाओं में कमी करने की प्रतिबद्धता जताई। USTR के अनुसार, बांग्लादेश ने अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों के लिए व्यापक बाजार पहुंच देने पर सहमति जताई है।

समझौते में अमेरिका से कृषि उत्पादों और ऊर्जा की बड़ी खरीद भी शामिल है। बांग्लादेश ने लगभग 3.5 अरब डॉलर के अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदने और 15 वर्षों में करीब 15 अरब डॉलर के अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई थी। इसके अलावा, सरकारी विमानन कंपनी Biman Bangladesh Airlines द्वारा 14 Boeing विमानों की प्रस्तावित खरीद को भी व्यापक वाणिज्यिक पैकेज का हिस्सा बताया गया था।

‘द डेली स्टार’ के लेख में तर्क दिया गया है कि समझौते की आलोचना किसी एक प्रावधान को लेकर नहीं, बल्कि विभिन्न प्रतिबद्धताओं के सामूहिक प्रभाव और उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर है। लेख के अनुसार, अंतरिम सरकार के कार्यकाल के बिल्कुल अंतिम चरण में इतना व्यापक समझौता करने के फैसले पर यह सवाल उठता है कि इसके पीछे आर्थिक और राजनीतिक गणना क्या थी।

हालांकि, समझौते के समर्थकों ने इसके संभावित आर्थिक लाभ भी गिनाए हैं। बांग्लादेश के मौजूदा विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने जून में संसद में कहा था कि समझौता विदेशी निवेश आकर्षित करने, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बांग्लादेश की स्थिति बेहतर करने में मदद कर सकता है।

इस तरह, अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार समझौता अब केवल टैरिफ में कमी का मुद्दा नहीं रह गया है। इसके दीर्घकालिक आर्थिक प्रभाव, घरेलू बाजार पर असर और भविष्य की सरकारों के लिए तय की गई प्रतिबद्धताओं को लेकर बांग्लादेश में बहस जारी है।