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यमन के हूती विद्रोही समूह ने रविवार को सऊदी अरब के हवाई अड्डों और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने को लेकर एयरलाइंस, विमानन कर्मचारियों और यात्रियों को फिर चेतावनी दी। यह चेतावनी दोनों देशों के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों और सीमा पार हमलों के बीच जारी की गई है।
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि मक्का और मदीना के हवाई अड्डों को छोड़कर सऊदी अरब के अन्य हवाई अड्डे और हवाई क्षेत्र उनके संगठन की ओर से संभावित हमलों के दायरे में हैं।
सरी ने एयरलाइंस, विमानन क्षेत्र के कर्मचारियों और यात्रियों से चेतावनी को गंभीरता से लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि हूती समूह अपने घोषित रुख 'हवाई अड्डे के बदले हवाई अड्डा, नाकेबंदी के बदले नाकेबंदी और तनाव बढ़ाने के बदले तनाव बढ़ाना' पर कायम रहेगा, जब तक उसके उद्देश्य पूरे नहीं हो जाते।
यह चेतावनी सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कथित हमले के एक दिन बाद आई है। शिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने बताया कि इस हमले में 12 लोगों की मौत हुई और 309 लोग घायल हुए।
हाल के दिनों में क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ा है। हूती समूह ने सऊदी अरब के भीतर विभिन्न ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज किए हैं, जबकि सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन के हूती-नियंत्रित क्षेत्रों पर हवाई हमले बढ़ाए हैं। इसके साथ ही यमन के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में भी लड़ाई तेज हो गई है।
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास यमन की सरकारी सेनाओं और हूती लड़ाकों के बीच संघर्ष जारी है। सरकारी बलों को सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन का समर्थन प्राप्त है। यह जलडमरूमध्य लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच समुद्री आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है।
इस बीच, यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने रविवार को सऊदी अरब में नागरिक बुनियादी ढांचे पर हूतियों के लगातार हमलों की निंदा की। उन्होंने चेतावनी दी कि बढ़ता तनाव क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है और यमन में शांति प्रयासों को और जटिल बना रहा है।
ग्रुंडबर्ग ने कहा कि ये हमले संघर्ष में गंभीर वृद्धि को दर्शाते हैं और हिंसा के चक्र को जारी रखते हुए शांति स्थापित करने की कोशिशों में बाधा डालते हैं। उन्होंने हूती समूह से हमले रोकने की अपील की और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने पर जोर दिया।
उन्होंने विशेष रूप से नागरिकों और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने पर रोक से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के प्रावधानों का सम्मान करने की आवश्यकता बताई।