आरबीआई ने ओएमओ और फॉरेक्स स्वैप के जरिए 3 लाख करोड़ रुपये की तरलता बढ़ाने की घोषणा कीBy Admin Wed, 24 December 2025 05:59 AM

मुंबई - भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को बैंकिंग प्रणाली में नकदी की कमी को दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर तरलता डालने के नए कदमों की घोषणा की। ओपन मार्केट ऑपरेशंस (ओएमओ) और विदेशी मुद्रा स्वैप के संयोजन के जरिए केंद्रीय बैंक आने वाले हफ्तों में लगभग 3 लाख करोड़ रुपये की तरलता प्रणाली में डालेगा।

इस योजना के तहत आरबीआई सरकारी बॉन्ड की खरीद करेगा, जिसकी कुल राशि 2 लाख करोड़ रुपये होगी। यह खरीद चार समान किस्तों में की जाएगी, जिनमें प्रत्येक किस्त 50,000 करोड़ रुपये की होगी। ये ओएमओ 29 दिसंबर, 5 जनवरी, 12 जनवरी और 22 जनवरी को आयोजित किए जाएंगे।

इसके अलावा, केंद्रीय बैंक 13 जनवरी को 10 अरब डॉलर का तीन वर्षीय यूएसडी/आईएनआर बाय-सेल फॉरेक्स स्वैप भी करेगा, जिससे बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त रुपये की तरलता उपलब्ध होगी।

बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी तरलता डालने की उम्मीद पहले से ही थी, खासकर तब, जब आरबीआई ने पिछले सप्ताह विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर बेचकर हस्तक्षेप किया था।

तरलता की कमी का मुख्य कारण हालिया मुद्रा बाजार हस्तक्षेप माना जा रहा है। पिछले सप्ताह आरबीआई ने रुपये में तेज गिरावट को रोकने के लिए आक्रामक तरीके से डॉलर बेचे थे। रुपये पर दबाव अमेरिका के साथ संभावित व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता और भारतीय शेयर व ऋण बाजारों से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार निकासी के कारण बना था।

बाजार सहभागियों का मानना है कि आरबीआई का यह कदम समय पर उठाया गया और फिलहाल पर्याप्त है। उनका कहना है कि आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि तरलता की स्थिति कैसे बदलती है और क्या केंद्रीय बैंक को दोबारा विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ता है। यदि दबाव बना रहा तो चौथी तिमाही में और कदम उठाए जा सकते हैं।

हाल ही में हुई मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बाजारों को भरोसा दिलाया था कि बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त तरलता सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा था कि यह समर्थन बिना किसी औपचारिक अधिशेष लक्ष्य (नेट डिमांड एंड टाइम लाइबिलिटीज के लगभग 1 प्रतिशत) को निर्धारित किए भी जारी रहेगा।

दिसंबर महीने में अब तक आरबीआई ने बॉन्ड खरीद और फॉरेक्स स्वैप के जरिए करीब 1.45 लाख करोड़ रुपये की स्थायी तरलता पहले ही प्रणाली में डाली है।

बॉन्ड बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि ओएमओ अधिक तरल सरकारी प्रतिभूतियों में किए जाते हैं, तो इससे बाजार में भागीदारी बढ़ेगी और बेहतर मूल्य निर्धारण में मदद मिलेगी। कम तरल बॉन्ड के मामले में बैंक अक्सर अधिक ऊंचे दाम पर बोली लगाते हैं, जिससे इन परिचालनों की प्रभावशीलता कम हो जाती है।

इससे पहले वर्ष की शुरुआत में आरबीआई ने इससे भी बड़े पैमाने पर तरलता समर्थन दिया था। चालू कैलेंडर वर्ष की पहली छमाही में केंद्रीय बैंक ने बैंकिंग प्रणाली में लगभग 9.5 लाख करोड़ रुपये डाले थे। इससे दिसंबर 2024 के मध्य से चली आ रही तरलता की कमी मार्च 2025 के अंत तक अधिशेष में बदल गई थी। यह समर्थन मुख्य रूप से ओपन मार्केट खरीद, दीर्घकालिक रेपो परिचालन और यूएसडी/आईएनआर फॉरेक्स स्वैप के जरिए दिया गया था।

 

With inputs from IANS