इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे आईआईपी आंकड़े, फेड की मीटिंग के मिनट्स और एफआईआई की चालBy Admin Sun, 28 December 2025 06:20 AM

मुंबई- भारतीय शेयर बाजार ने बीते सप्ताह का समापन कमजोरी के साथ किया, और अब निवेशकों की नजरें उन प्रमुख घरेलू और वैश्विक संकेतकों पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।

इस सप्ताह औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स, रुपये की चाल और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की गतिविधियां बाजार के लिए अहम रहेंगी।

शुक्रवार को ताजा ट्रिगर्स की कमी के बीच निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली जारी रहने से भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद हुए। मिश्रित वैश्विक संकेतों और सतर्क निवेश धारणा ने भी बाजार पर दबाव बनाया। सेंसेक्स 367 अंक या 0.43 प्रतिशत गिरकर 85,041.45 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 100 अंक या 0.38 प्रतिशत फिसलकर 26,042.30 पर आ गया।

विस्तृत बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। बीएसई मिडकैप इंडेक्स 0.18 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.34 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में बाजार का रुख सुस्त बना रह सकता है। विश्लेषकों के अनुसार, तरलता की स्थिति तंग रहने और निवेशकों के अहम आर्थिक संकेतकों का इंतजार करने के चलते अगले सप्ताह बाजार सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है।

विशेषज्ञों ने कहा, “जब तक निफ्टी 26,000–25,800 के तत्काल समर्थन स्तर के ऊपर बना रहता है, तब तक बाजार की धारणा सकारात्मक रुख के साथ रचनात्मक बनी रह सकती है।”

उन्होंने आगे बताया, “ऊपर की ओर 26,200 का स्तर तत्काल प्रतिरोध के रूप में काम करेगा, इसके बाद 26,500 का स्तर अहम रहेगा। वहीं नीचे की ओर 26,000 और फिर 25,800 पर समर्थन है। यदि 25,800 के नीचे निर्णायक टूट होती है, तो अल्पकालिक बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।”

आने वाले सप्ताह में सबसे बड़ा घरेलू संकेत भारत के औद्योगिक उत्पादन आंकड़े होंगे। निवेशक नवंबर 2025 के लिए औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) पर करीबी नजर रखेंगे, जो 29 दिसंबर को जारी किया जाना है।

वैश्विक स्तर पर एक अहम संकेत अमेरिका से आएगा, जहां फेडरल रिजर्व 31 दिसंबर को फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की बैठक के मिनट्स जारी करेगा।

दिसंबर की मौद्रिक नीति बैठक में फेड ने ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती कर दर को 3.75 प्रतिशत कर दिया था, जिससे उसकी नरम मौद्रिक नीति जारी रही।

निवेशक फेड के मिनट्स से भविष्य की ब्याज दरों की दिशा, महंगाई और आर्थिक वृद्धि को लेकर केंद्रीय बैंक के दृष्टिकोण के संकेत तलाशेंगे।

भारतीय रुपये की चाल भी निवेशकों के रडार पर बनी रहेगी। शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 19 पैसे कमजोर होकर 89.90 पर बंद हुआ।

बाजार जानकारों के अनुसार, घरेलू स्तर पर किसी बड़े नीतिगत ऐलान की उम्मीद न होने के चलते निवेशक सतर्क रुख अपना सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताह में स्टॉक-विशेष गतिविधियां बनी रह सकती हैं, जबकि व्यापक सूचकांक आर्थिक आंकड़ों, वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेश प्रवाह का आकलन करते हुए सीमित दायरे में कारोबार कर सकते हैं।

 

With inputs from IANS