नवंबर में इंडिगो की घरेलू बाजार हिस्सेदारी घटी, भारत में कुल यात्री संख्या में 6.92 प्रतिशत की वृद्धिBy Admin Mon, 29 December 2025 04:50 AM

नई दिल्ली — इस महीने की शुरुआत में गंभीर परिचालन संकट का सामना करने वाली देश की सबसे बड़ी लो-कॉस्ट एयरलाइन इंडिगो की घरेलू बाजार हिस्सेदारी नवंबर में घटकर 63.6 प्रतिशत रह गई। यह जानकारी नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के ताजा आंकड़ों में सामने आई है।

अक्टूबर महीने में इंडिगो की घरेलू बाजार हिस्सेदारी 65.6 प्रतिशत थी।

वहीं, एयर इंडिया समूह (एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस) की बाजार हिस्सेदारी नवंबर में बढ़कर 26.7 प्रतिशत हो गई, जो अक्टूबर में 25.7 प्रतिशत थी।

अकासा एयर की घरेलू बाजार हिस्सेदारी में भी गिरावट दर्ज की गई और यह नवंबर में 5.2 प्रतिशत से घटकर 4.7 प्रतिशत रह गई।

डीजीसीए के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से नवंबर 2025 के दौरान घरेलू एयरलाइनों ने कुल 1,526.35 लाख यात्रियों को परिवहन किया, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह संख्या 1,464.02 लाख थी। इस प्रकार सालाना आधार पर 4.26 प्रतिशत और मासिक आधार पर 6.92 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

नवंबर 2025 में निर्धारित घरेलू उड़ानों की कुल रद्दीकरण दर 1.33 प्रतिशत रही।

इस बीच, इंडिगो के हालिया परिचालन संकट के बाद केंद्र सरकार ने तीन नई एयरलाइनों को परिचालन शुरू करने के लिए प्रारंभिक मंजूरी दी है। इस संकट के दौरान देशभर में हजारों यात्री कई दिनों तक फंसे रहे थे, जिससे सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन के प्रभुत्व के दुरुपयोग का मुद्दा भी उजागर हुआ।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने क्षेत्रीय एयरलाइनों — शंख एयर, अल हिंद एयर और फ्लाईएक्सप्रेस — को ‘नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (एनओसी) प्रदान किया है।

इस महीने की शुरुआत में इंडिगो को दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर 4,000 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं। इसका मुख्य कारण क्रू की भारी कमी बताया गया। उड़ान ड्यूटी समय सीमा (एफडीटीएल) मानदंडों के दूसरे चरण के लागू होने से क्रू की उपलब्धता प्रभावित हुई, जिसके चलते देशभर के कई हवाई अड्डों पर विमान खड़े रह गए और यात्रियों की यात्रा योजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं।

सरकार ने इंडिगो की बड़े पैमाने पर उड़ान रद्द होने की घटनाओं की जांच भी शुरू कर दी है, जिनके कारण देशभर के हवाई अड्डों पर हजारों यात्री फंस गए थे।

 

With inputs from IANS