दिसंबर में यूपीआई लेनदेन 29 प्रतिशत बढ़कर 21.63 अरब पहुंचे, उपभोग वृद्धि बनी मजबूतBy Admin Thu, 01 January 2026 09:21 AM

नई दिल्ली: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने दिसंबर महीने में सालाना आधार पर 29 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए कुल 21.63 अरब लेनदेन किए। इसके साथ ही लेनदेन मूल्य में भी 20 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी हुई और यह 27.97 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह जानकारी गुरुवार को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों में सामने आई।

मासिक आधार पर भी यूपीआई के लेनदेन की संख्या और राशि दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। एनपीसीआई के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में औसत दैनिक लेनदेन राशि 90,217 करोड़ रुपये रही, जो नवंबर में 87,721 करोड़ रुपये थी।

दिसंबर महीने में औसत दैनिक लेनदेन संख्या 698 मिलियन दर्ज की गई, जो नवंबर में 682 मिलियन थी।

नवंबर में यूपीआई लेनदेन की संख्या सालाना आधार पर 32 प्रतिशत बढ़कर 20.47 अरब रही थी, जबकि लेनदेन राशि 22 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 26.32 लाख करोड़ रुपये तक पहुंची थी।

इस बीच, त्वरित धन अंतरण प्रणाली (IMPS) के माध्यम से दिसंबर में मासिक लेनदेन 6.62 लाख करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर 10 प्रतिशत अधिक है और नवंबर के 6.15 लाख करोड़ रुपये से बढ़ा है।

दिसंबर में आईएमपीएस लेनदेन की संख्या 380 मिलियन रही, जो नवंबर में 369 मिलियन थी। आईएमपीएस के जरिए औसत दैनिक लेनदेन राशि 21,269 करोड़ रुपये दर्ज की गई, जो नवंबर में 20,506 करोड़ रुपये थी।

हालिया एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सक्रिय यूपीआई क्यूआर कोड की संख्या बढ़कर 709 मिलियन हो गई है, जो जुलाई 2024 से 21 प्रतिशत अधिक है। वर्ल्डलाइन इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, किराना दुकानों, फार्मेसियों, परिवहन केंद्रों और ग्रामीण बाजारों में क्यूआर कोड की व्यापक उपलब्धता ने स्कैन-एंड-पे को देशभर में डिफॉल्ट भुगतान माध्यम बना दिया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) लेनदेन, व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) लेनदेन की तुलना में लगातार आगे बने हुए हैं, जो रोजमर्रा के खुदरा भुगतानों में यूपीआई के प्रभुत्व को दर्शाता है।

P2M लेनदेन 35 प्रतिशत बढ़कर 37.46 अरब तक पहुंच गए, जबकि P2P लेनदेन 29 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 21.65 अरब रहे। औसत लेनदेन राशि घटकर 1,262 रुपये रह गई (पहले 1,363 रुपये), जो परिवहन, भोजन, स्वास्थ्य आवश्यकताओं और हाइपरलोकल कॉमर्स जैसे सूक्ष्म लेनदेन में बढ़ते उपयोग को दर्शाता है।

उल्लेखनीय है कि भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) ने सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करने, शहरी–ग्रामीण अंतर को कम करने और देश को एक वैश्विक डिजिटल शक्ति के रूप में मजबूत करने में परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है।

 

With inputs from IANS