भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेश रिकॉर्ड स्तर पर, 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 8.1 अरब डॉलर तक पहुंचाBy Admin Thu, 15 January 2026 06:25 AM

नई दिल्ली - एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत के रियल एस्टेट बाजार में संस्थागत निवेश रिकॉर्ड 8.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसमें चौथी तिमाही में 3.73 अरब डॉलर का अब तक का सबसे अधिक तिमाही निवेश अहम योगदानकर्ता रहा।

वेस्टियन की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में कुल संस्थागत निवेश 2024 की तुलना में 19 प्रतिशत और 2023 की तुलना में 88 प्रतिशत अधिक रहा। वहीं, चौथी तिमाही में निवेश प्रवाह पिछली तिमाही के मुकाबले 112 प्रतिशत बढ़ा।

रिपोर्ट के अनुसार, वाणिज्यिक परिसंपत्तियों (कमर्शियल एसेट्स) ने 2025 में कुल निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा आकर्षित किया, जो 63 प्रतिशत रहा। यह 2024 में 35 प्रतिशत था। वाणिज्यिक परिसंपत्तियों में निवेश का मूल्य 113 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5.1 अरब डॉलर हो गया। चौथी तिमाही में भी 61 प्रतिशत निवेश वाणिज्यिक परिसंपत्तियों में हुआ, जिसका कुल मूल्य 2.3 अरब डॉलर रहा। इसका प्रमुख कारण ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) से बढ़ती मांग बताया गया है।

इसके अलावा, कुल तिमाही निवेश का 13 प्रतिशत हिस्सा सतत (सस्टेनेबल) परियोजना विकास में लगाया गया, जो रियल एस्टेट विकास में स्थिरता को प्राथमिकता देने की निवेशकों की स्पष्ट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

आवासीय क्षेत्र में निवेश चौथी तिमाही में साल-दर-साल आधार पर 129 प्रतिशत बढ़कर 438.4 मिलियन डॉलर हो गया। वहीं, औद्योगिक और वेयरहाउसिंग निवेश बढ़कर 615.4 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछली तिमाही की तुलना में सात गुना से अधिक है। यह घरेलू खपत के चरम स्तर पर पहुंचने के बीच लॉजिस्टिक्स पार्कों की मजबूत मांग को दर्शाता है।

रिपोर्ट में कहा गया कि चौथी तिमाही 2025 में विदेशी निवेश दस गुना से अधिक बढ़कर 1.54 अरब डॉलर हो गया। इस दौरान तिमाही निवेश का 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सतत विकास से जुड़ी परियोजनाओं में लगाया गया।

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशी निवेशकों की सतर्कता के बावजूद, विदेशी और घरेलू निवेशकों के बीच सह-निवेश (को-इनवेस्टमेंट) तिमाही आधार पर 90 प्रतिशत बढ़कर 1.38 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

वेस्टियन के सीईओ श्रीनिवास राव (एफआरआईसीएस) ने कहा, “2025 में रिकॉर्ड संस्थागत निवेश भारत की दीर्घकालिक आर्थिक बुनियादों में निवेशकों के निरंतर भरोसे को मजबूत करता है।”

उन्होंने आगे कहा कि जैसे-जैसे पूंजी का रुझान सतत विकास, जीसीसी-आधारित मांग और बढ़ती घरेलू भागीदारी की ओर बढ़ रहा है, भारतीय रियल एस्टेट एक मजबूत, विविधतापूर्ण और भविष्य के लिए तैयार निवेश बाजार के रूप में लगातार विकसित हो रहा है।

 

With inputs from IANS