एफवाई27 तक गोल्ड-लोन एनबीएफसी का एयूएम बढ़कर 4 लाख करोड़ रुपये के पार जाने की उम्मीदBy Admin Thu, 22 January 2026 09:16 AM

नई दिल्ली - सोने के बदले ऋण देने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) चालू और अगले वित्त वर्ष के बीच करीब 40 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ने का अनुमान है और मार्च 2027 तक यह 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। यह जानकारी गुरुवार को जारी क्रिसिल रेटिंग्स की एक रिपोर्ट में दी गई।

रिपोर्ट के अनुसार, यह तेज वृद्धि ऊंची सोने की कीमतों, सुरक्षित ऋण की ओर बढ़ते रुझान और विकसित होते नियामकीय ढांचे के कारण होगी। यह वृद्धि दर वित्त वर्ष 2023 से 2025 के बीच दर्ज 27 प्रतिशत सीएजीआर से कहीं अधिक है।

क्रिसिल रेटिंग्स की निदेशक अपर्णा किरीबकरन ने बताया कि बड़े गोल्ड-लोन एनबीएफसी अपनी मजबूत ब्रांड पहचान के चलते मौजूदा शाखाओं के माध्यम से अपने पोर्टफोलियो का विस्तार कर रहे हैं। वहीं, मध्यम आकार की कंपनियां दोहरी रणनीति अपना रही हैं—एक ओर नई शाखाएं खोलना और दूसरी ओर बड़े एनबीएफसी तथा बैंकों के लिए ओरिजिनेटिंग पार्टनर के रूप में काम करना।

इन प्रयासों और ऊंची सोने की कीमतों के बीच मजबूत मांग के चलते, पिछले दो वित्त वर्षों में गोल्ड-लोन केंद्रित एनबीएफसी की प्रति शाखा कारोबारी मात्रा में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में प्रति शाखा औसत एयूएम 14 करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2024 में 10 करोड़ रुपये था।

चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में सोने की कीमतों में 68 प्रतिशत की तेजी आई है और यह रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। इससे गिरवी रखे गए सोने का मूल्य बढ़ा है, जिससे ऋणदाताओं को कर्ज वितरण बढ़ाने में मदद मिली है।

इसके अलावा, असुरक्षित ऋण जैसे कुछ सेगमेंट में ऋण की सीमित उपलब्धता के चलते, उधारकर्ता वैकल्पिक वित्तीय स्रोतों की तलाश कर रहे हैं। इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए गोल्ड-लोन एनबीएफसी, बैंकों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद, अपने बाजार विस्तार पर ध्यान दे रही हैं।

नियामकीय मोर्चे पर, 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले कम टिकट साइज के गोल्ड लोन के लिए लोन-टू-वैल्यू (एलटीवी) मानदंडों में सरलीकरण से एनबीएफसी को अतिरिक्त ऋण देने की गुंजाइश मिलने की उम्मीद है।

क्रिसिल रेटिंग्स के एसोसिएट डायरेक्टर प्रशांत माने ने कहा कि गोल्ड लोन की मांग को असुरक्षित से सुरक्षित ऋण की ओर उधारकर्ताओं के बढ़ते रुझान से भी समर्थन मिल रहा है। उन्होंने बताया कि असुरक्षित ऋण क्षेत्र में परिसंपत्ति गुणवत्ता से जुड़ी चुनौतियों, कड़े अंडरराइटिंग मानकों और सख्त नियामकीय कार्रवाइयों के बाद इस मार्ग से ऋण उपलब्धता में भारी कमी आई है।

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गोल्ड-लोन एनबीएफसी को जोखिम प्रबंधन और परिचालन प्रक्रियाओं—जैसे गिरवी रखे गए सोने की शुद्धता जांच, वजन मापन और प्रामाणिकता मूल्यांकन—पर कड़ा नियंत्रण बनाए रखना होगा।

 

With inputs from IANS