FY26 में कर रियायतों के बाद FY27 में वित्तीय सख्ती का दौर संभव: रिपोर्टBy Admin Fri, 23 January 2026 05:16 AM

नई दिल्ली - एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) आगामी केंद्रीय बजट के लिहाज से वित्तीय सख्ती का साल हो सकता है, क्योंकि FY26 में सरकार ने बड़े पैमाने पर कर रियायतें दी हैं।

एचएसबीसी म्यूचुअल फंड की ‘बजट प्रीव्यू’ रिपोर्ट के मुताबिक, व्यय के मोर्चे पर कम से कम 10 प्रतिशत पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) वृद्धि का अनुमान लगाया गया है, जबकि राजस्व व्यय के लिए सीमित गुंजाइश मानी गई है।

रिपोर्ट में कहा गया, “राजकोषीय घाटे के संदर्भ में, फिस्कल ग्लाइड पाथ पर आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता FY27 में 16.6 लाख करोड़ रुपये (आधार परिदृश्य) के घाटे का संकेत देती है, जो जीडीपी का 4.2 प्रतिशत होगा। इससे FY27 में ऋण-से-जीडीपी अनुपात के 55.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।”

रिपोर्ट के अनुसार, नाममात्र जीडीपी वृद्धि दर कम रहने के बावजूद कुल घाटे का लक्ष्य जीडीपी के 4.4 प्रतिशत पर पूरा किया जा सकता है, क्योंकि घाटे का पूर्ण स्तर FY26 के बजट अनुमान (BE) के समय तय स्तर से अधिक बना रहेगा।

जनवरी तक FY27 में ऋण परिपक्वता (रेडेम्प्शन) 5.5 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। यदि कुछ बायबैक, स्विच या समयपूर्व भुगतान किए जाते हैं, तो इसे घटाकर 4.5 लाख करोड़ रुपये तक लाया जा सकता है, जो फिर भी FY26 के 3.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इसके चलते सकल उधारी (ग्रॉस बॉरोइंग) बढ़कर 16.3 लाख करोड़ रुपये (आधार परिदृश्य) तक पहुंच सकती है।

रिपोर्ट में नाममात्र जीडीपी वृद्धि 10 प्रतिशत सालाना मानी गई है, जबकि कुल देनदारियों में वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी, करीब 8 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

साथ ही, उधारी की भारित औसत लागत पर भी चिंता जताई गई है। FY25 में यह लगभग 7 प्रतिशत थी और FY26 की दूसरी तिमाही तक यह करीब 7.20 प्रतिशत रही, जबकि नाममात्र जीडीपी वृद्धि केवल 8 प्रतिशत के आसपास थी। रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसी स्थिति में ऋण-से-जीडीपी अनुपात के लिहाज से वित्तीय समेकन की एक मजबूत और सकारात्मक तस्वीर पेश करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

 

With inputs from IANS