तरलता सुधारने के लिए आरबीआई बैंकिंग प्रणाली में डालेगा 2 लाख करोड़ रुपये से अधिकBy Admin Sat, 24 January 2026 07:30 AM

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को तरलता दबाव को कम करने के उद्देश्य से कई अहम कदमों की घोषणा की है, जिनके तहत बैंकिंग प्रणाली में 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि डाली जाएगी।

आरबीआई ने कहा कि वह वित्तीय प्रणाली में तरलता की स्थिति को सहज बनाने के लिए खुले बाजार में सरकारी बॉन्ड की खरीद, विदेशी मुद्रा स्वैप और वैरिएबल रेट रेपो (वीआरआर) ऑपरेशन का संयोजन इस्तेमाल करेगा। ये कदम मौजूदा तरलता और वित्तीय हालात की समीक्षा के बाद उठाए गए हैं।

इन उपायों के तहत केंद्रीय बैंक 30 जनवरी को 25,000 करोड़ रुपये की राशि के लिए 90-दिवसीय वैरिएबल रेट रेपो ऑपरेशन आयोजित करेगा। इसके जरिए बैंक अपनी गिरवी रखी गई संपत्तियों के बदले बाजार-निर्धारित ब्याज दरों पर अल्पकालिक धन उधार ले सकेंगे। वीआरआर में ब्याज दर पहले से तय नहीं होती, बल्कि नीलामी के दौरान बाजार की बोलियों के आधार पर तय होती है।

इसके अलावा, आरबीआई 4 फरवरी को तीन वर्ष की अवधि के लिए 10 अरब डॉलर का डॉलर-रुपया खरीद/बिक्री स्वैप नीलामी आयोजित करेगा। इस व्यवस्था के तहत बैंक डॉलर आरबीआई को बेचेंगे और बदले में रुपये प्राप्त करेंगे, साथ ही तय अग्रिम दर पर भविष्य में उन डॉलर को वापस खरीदने का समझौता करेंगे। इससे आरबीआई को अस्थायी रूप से रुपये उधार लेने में मदद मिलेगी, विनिमय दर जोखिम नियंत्रित रहेगा और विदेशी मुद्रा भंडार में स्थायी बदलाव किए बिना बाजार में तरलता बढ़ेगी।

इसके साथ ही, रिजर्व बैंक खुले बाजार परिचालन (ओएमओ) के माध्यम से कुल 1 लाख करोड़ रुपये के सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद करेगा। यह खरीद दो चरणों में 50-50 हजार करोड़ रुपये की होगी, जो 5 फरवरी और 12 फरवरी को आयोजित की जाएगी।

आरबीआई ने बताया कि घोषित प्रत्येक ऑपरेशन से जुड़ी विस्तृत दिशानिर्देश अलग से जारी किए जाएंगे। केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि वह आगे भी तरलता और बाजार की स्थिति पर नजर रखेगा और आवश्यकतानुसार कदम उठाता रहेगा, ताकि वित्तीय प्रणाली में सुव्यवस्थित तरलता बनी रहे।

 

With inputs from IANS