व्यापार समझौते से 572.3 अरब डॉलर के ईयू फार्मा और मेडिकल डिवाइस बाजार के दरवाजे खुलेBy Admin Wed, 28 January 2026 06:17 AM

नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से 572.3 अरब डॉलर के ईयू फार्मास्यूटिकल्स और मेडिकल डिवाइसेज़ बाजार तक पहुंच आसान हो गई है, जिससे भारतीय फार्मा क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। यह जानकारी सरकार ने दी है।

रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते से भारतीय फार्मा उद्योगों को विस्तार का अवसर मिलेगा, रोजगार सृजन होगा और वैश्विक फार्मा क्षेत्र में भारत की एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थिति और मजबूत होगी। इससे “दुनिया की फार्मेसी” के रूप में भारत की बढ़ती पहचान को भी बल मिलेगा।

मंत्रालय ने कहा कि इस एफटीए से कुशल नौकरियों में वृद्धि, औद्योगिक रोजगार के अवसर, एमएसएमई की मजबूत भागीदारी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बेहतर एकीकरण की उम्मीद है।

केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि यह समझौता फार्मास्यूटिकल्स और मेडिकल डिवाइसेज़ क्षेत्र के लिए नए अवसरों के द्वार खोलता है।
उन्होंने कहा, “ईयू के 572.3 अरब डॉलर के फार्मा और मेडटेक बाजार तक पहुंच और भारतीय मेडिकल डिवाइसेज़ पर उदार शुल्क व्यवस्था इस उच्च-मूल्य वाले क्षेत्र की रफ्तार को तेज करेगी।”

नड्डा ने आगे कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत स्वास्थ्य और विनिर्माण क्षेत्र में एक भरोसेमंद वैश्विक भागीदार के रूप में अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है।”

भारत-ईयू एफटीए को भारत की सबसे रणनीतिक आर्थिक साझेदारियों में एक अहम मील का पत्थर बताया गया है। आधुनिक और नियम-आधारित इस व्यापार समझौते को समकालीन वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप तैयार किया गया है, जिससे दुनिया की चौथी और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बाजार एकीकरण को मजबूती मिलेगी।

यह समझौता उच्च-मूल्य वाले क्षेत्रों में तेजी से विकास के लिए तरजीही बाजार पहुंच देगा, ‘मेक इन इंडिया’ मेडिकल डिवाइसेज़ पर शुल्क में रियायत देगा और अकार्बनिक व कार्बनिक रसायनों, उर्वरकों, फार्मास्यूटिकल्स, कॉस्मेटिक्स, साबुन और डिटर्जेंट जैसे क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देगा। साथ ही, क्षमता विस्तार और एमएसएमई क्लस्टर विकास के जरिए समग्र सेक्टोरल ग्रोथ को गति मिलेगी।

इस एफटीए से गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में विस्तार के बड़े अवसर खुलेंगे। तटीय निर्यात हब्स को भी निर्यात-आधारित विकास को बढ़ाने का मौका मिलेगा, जिससे रोजगार और प्रोसेसिंग-आधारित क्षेत्रों को समर्थन मिलेगा।

मंत्रालय ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए साझा मूल्यों को मजबूत करता है, नवाचार को प्रोत्साहित करता है और भारत व यूरोप दोनों के लिए समावेशी, लचीली और भविष्य के लिए तैयार विकास की नींव रखता है।

 

With inputs from IANS