रिकॉर्ड स्तरों से मुनाफावसूली के बाद सोना-चांदी की कीमतों में गिरावटBy Admin Fri, 30 January 2026 07:14 AM

मुंबई — पिछले सत्र में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद शुक्रवार को सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों द्वारा आक्रामक मुनाफावसूली किए जाने और अमेरिकी डॉलर में मजबूती आने से कीमती धातुओं पर दबाव बना।

एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना इंट्रा-डे कारोबार में सुबह करीब 10 बजे 1.03 प्रतिशत गिरकर 1,67,656 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं, मार्च डिलीवरी वाली चांदी 3.42 प्रतिशत टूटकर 3,86,200 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी।

पिछले सत्र में एमसीएक्स पर चांदी की कीमतें 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची थीं, जिसके बाद इसमें छह प्रतिशत से अधिक की तेज गिरावट आई और भाव 3,75,900 रुपये तक फिसल गए। बाद में इसमें आंशिक रिकवरी देखने को मिली और कीमतें मौजूदा स्तर तक पहुंचीं।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी दबाव देखने को मिला। स्पॉट गोल्ड की कीमतें चार प्रतिशत से अधिक गिरकर 5,156.64 डॉलर प्रति औंस तक आ गईं, हालांकि बाद में इसमें सुधार हुआ और भाव 5,346.42 डॉलर पर लौट आए। इसके बावजूद, इस साल अब तक सोने में 20 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की जा चुकी है, जबकि चांदी ने साल-दर-साल आधार पर करीब 53 प्रतिशत की बढ़त हासिल की है।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि दीर्घकालिक संरचना अब भी मजबूत बनी हुई है, लेकिन हालिया तेज उछाल के बाद बाजार में शॉर्ट-टर्म ओवरहीटिंग के संकेत दिख रहे हैं, जिसके चलते इंट्रा-डे उतार-चढ़ाव और मुनाफावसूली तेज हुई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, धातुएं अभी भी मजबूत अपट्रेंड में हैं, लेकिन कीमतें ओवरबॉट ज़ोन में पहुंच जाने के कारण निवेशकों ने जमकर मुनाफावसूली की। साथ ही, संरचनात्मक आपूर्ति की कमी और औद्योगिक मांग अब भी तेजी के रुख को समर्थन दे रही है।

मार्केट वॉचर्स का कहना है कि चांदी के लिए अहम सपोर्ट स्तर 3,75,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास है।

इस बीच, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में फिलहाल विराम के संकेत मिलने से डॉलर इंडेक्स में हल्की मजबूती आई। साथ ही, भू-राजनीतिक तनाव भी ऊंचा बना रहा, क्योंकि खबरें हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड की हालिया रिपोर्ट में निवेशकों को चांदी में मुनाफा वसूली करने और पोर्टफोलियो को विविधीकृत भारतीय इक्विटी फंड्स या ब्लू-चिप शेयरों की ओर संतुलित करने की सलाह दी गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेशकों को कीमती धातुओं में अपनी हिस्सेदारी को सुरक्षित-निवेश स्तर तक सीमित रखना चाहिए और आगे की तेजी के पीछे नहीं भागना चाहिए। फिलहाल गोल्ड-टू-सिल्वर अनुपात घटकर करीब 46:1 पर आ गया है, जबकि इसका 10 साल का औसत लगभग 80:1 के आसपास रहा है।

 

With inputs from IANS