
नई दिल्ली- सरकार के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) की पहली छमाही में देश के 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) का कुल कारोबार 12 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है।
वर्तमान में 28 आरआरबी 26 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में फैली 22,158 शाखाओं के माध्यम से कार्यरत हैं, जो लगभग 730 जिलों को कवर करती हैं।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, “सभी 28 आरआरबी का कुल कारोबार वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, जो कुछ व्यक्तिगत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के कारोबार स्तर से भी अधिक है।”
इन बैंकों के पास सामूहिक रूप से 32.4 करोड़ जमा खाते और 3.2 करोड़ ऋण खाते हैं।
बयान में कहा गया कि आरआरबी का शुद्ध मुनाफा दिसंबर 2025 तक (अनंतिम) बढ़कर 7,720 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 6,820 करोड़ रुपये था।
साथ ही, सकल गैर-निष्पादित आस्तियां (जीएनपीए) और शुद्ध गैर-निष्पादित आस्तियां (एनएनपीए) दोनों में गिरावट का रुझान बना हुआ है।
वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव एम. नागराजू ने सभी आरआरबी से आने वाले समय में अपने प्रदर्शन को बनाए रखने और उसमें और सुधार करने का आह्वान किया है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण आबादी के बीच सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की पहुंच बढ़ाना, ऋण पोर्टफोलियो में विविधता लाना, आईटी अवसंरचना को मजबूत करना, वित्तीय सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी को बढ़ावा देना और विशेष रूप से ग्रामीण व दूरदराज के इलाकों में ग्राहकों के लिए शिकायत निवारण तंत्र को सुदृढ़ करना, सुधार के प्रमुख प्राथमिक क्षेत्र हैं।
डीएफएस सचिव ने आरआरबी, नाबार्ड और प्रायोजक बैंकों से संभावित चुनौतियों की पहले से पहचान करने और उनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए अपनी तैयारियों को मजबूत करने का भी आग्रह किया।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, आरआरबी प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग) के तहत निर्धारित सभी लक्ष्यों और उप-लक्ष्यों को लगातार हासिल कर रहे हैं, जो समाज के वंचित और लक्षित वर्गों की सेवा के प्रति उनकी मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इसके अलावा, आरआरबी वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। चालू वित्त वर्ष के दौरान इन्होंने 45.68 लाख से अधिक नए प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) खाते खोले हैं।
With inputs from IANS