सरकार ने कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग का बजट बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये किया, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का ऐलानBy Admin Sun, 01 February 2026 06:30 AM

नई दिल्ली - ‘मेक इन इंडिया’ और घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0 की घोषणा की। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के लिए आवंटन बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया गया, ताकि स्थानीय उत्पादन और नवाचार को गति मिल सके।

वित्त मंत्री ने बजट 2026-27 पेश करते हुए कहा कि सेमीकंडक्टर मिशन 1.0 के जरिए देश की क्षमताओं में विस्तार हुआ है और इसी आधार पर अब आईएसएम 2.0 शुरू किया जाएगा। इसके तहत उपकरण और सामग्री का उत्पादन, फुल-स्टैक भारतीय आईपी (बौद्धिक संपदा) का विकास और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा, “हम उद्योग-नेतृत्व वाले अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्रों पर भी ध्यान केंद्रित करेंगे, ताकि उन्नत तकनीक और कुशल कार्यबल तैयार किया जा सके। अप्रैल 2025 में शुरू की गई इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम, जिसका परिव्यय 22,999 करोड़ रुपये था, को पहले ही तय लक्ष्यों से दोगुने निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं।”

केंद्रीय बजट 2026-27 में भविष्य के रोजगार सृजन के उद्देश्य से 10,000 करोड़ रुपये का एक समर्पित एसएमई ग्रोथ फंड शुरू करने का भी प्रस्ताव किया गया है, जिसके तहत चुनिंदा मानदंडों के आधार पर उद्यमों को प्रोत्साहन दिया जाएगा।

श्रम-प्रधान वस्त्र क्षेत्र के लिए वित्त मंत्री ने पांच प्रमुख घटकों वाला एक एकीकृत कार्यक्रम प्रस्तावित किया। पहला घटक राष्ट्रीय फाइबर योजना है, जिसका उद्देश्य रेशम, ऊन और जूट जैसे प्राकृतिक रेशों के साथ-साथ मानव निर्मित और नई औद्योगिक युग की फाइबर में आत्मनिर्भरता हासिल करना है।

दूसरा घटक टेक्सटाइल एक्सपैंशन एंड एम्प्लॉयमेंट स्कीम है, जिसके तहत पारंपरिक क्लस्टरों के आधुनिकीकरण के लिए मशीनरी, तकनीकी उन्नयन और साझा परीक्षण व प्रमाणन केंद्रों को पूंजी सहायता दी जाएगी।

तीसरा घटक राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प कार्यक्रम (एनएचएचपी) है, जिसका उद्देश्य मौजूदा योजनाओं को एकीकृत और सशक्त बनाते हुए बुनकरों और कारीगरों को लक्षित सहायता प्रदान करना है।

वित्त मंत्री ने बताया कि नवंबर 2025 में रेयर-अर्थ स्थायी मैग्नेट्स के लिए एक सरकारी योजना शुरू की गई थी।
उन्होंने कहा, “अब हम ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज-संपन्न राज्यों में समर्पित रेयर-अर्थ कॉरिडोर स्थापित करने का समर्थन करेंगे।”

 

With inputs from IANS