भारत–अमेरिका व्यापार समझौते पर गोयल का भरोसा – कृषि और डेयरी हितों से नहीं होगा समझौताBy Admin Wed, 04 February 2026 03:35 AM

नई दिल्ली। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को विपक्ष की आलोचनाओं के बीच स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के बीच होने वाला व्यापार समझौता देश के कृषि और डेयरी क्षेत्रों से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।

गोयल ने संकेत दिया कि विपक्ष समझौते का पूरा विवरण सामने आने से पहले ही उसकी आलोचना कर रहा है। उन्होंने कहा कि औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं, लेकिन समझौते पर अभी हस्ताक्षर नहीं हुए हैं।

उन्होंने बताया कि इस समझौते के तहत अमेरिका को भारत में बाजार तक पहुंच मिलेगी, वहीं भारत को भी अमेरिकी बाजार में अवसर प्राप्त होंगे। हालांकि समझौते की विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

उद्योग जगत का मानना है कि इतने बड़े बाजार के साथ समझौता प्रभावी ढंग से लागू होने पर भारत के निर्यात को बढ़ावा देगा, बाजार पहुंच को व्यापक बनाएगा और दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाओं के बीच रणनीतिक सहयोग को मजबूत करेगा।

पहले लगाए गए टैरिफ का असर भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर पड़ा था। अगस्त में जहां निर्यात 6.86 अरब डॉलर था, वहीं अक्टूबर में घटकर 6.30 अरब डॉलर रह गया। इसी अवधि में भारत का आयात 3.60 अरब डॉलर से बढ़कर 4.84 अरब डॉलर हो गया।

गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत अमेरिकी कृषि या डेयरी उत्पादों को घरेलू बाजार में प्रवेश की अनुमति नहीं देगा और देश के करोड़ों छोटे किसानों व सहकारी समितियों के हितों की रक्षा की जाएगी।

उन्होंने कहा, “यह समझौता किसानों, एमएसएमई, उद्यमियों और कुशल श्रमिकों के लिए अभूतपूर्व अवसर खोलेगा, जिससे ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजाइन इन इंडिया’ और ‘इनोवेट इन इंडिया’ को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा मिलेगा।”

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को शून्य की ओर ले जाने पर सहमत हुआ है, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह किन क्षेत्रों पर लागू होगा। गोयल के अनुसार, इस मुद्दे पर दोनों देशों की वार्ता अभी जारी है।

इस बीच, कुछ किसान संगठनों ने इस व्यापार समझौते का विरोध करते हुए इसे भारत के राष्ट्रीय हितों से समझौता बताया है। वामपंथी संगठन अखिल भारतीय किसान सभा ने बयान जारी कर समझौते के विभिन्न पहलुओं पर शंकाएं व्यक्त की हैं, जैसे नए टैरिफ कब लागू होंगे, व्यापार बाधाएं कैसे कम की जाएंगी और भारत किन अमेरिकी उत्पादों को खरीदने पर सहमत हुआ है।

हालांकि गोयल ने दोहराया कि यह समझौता संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करते हुए निर्यातकों, किसानों, मछुआरों और युवाओं के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध कराएगा।

समझौते की घोषणा के बाद भारतीय शेयर बाजार में तेजी देखी गई और रुपये में मजबूती आई। मंगलवार को सेंसेक्स 2,000 अंकों से अधिक उछलकर बंद हुआ, जबकि निफ्टी में 639 अंकों की बढ़त दर्ज की गई। विश्लेषकों का मानना है कि रुपये में मजबूती विदेशी निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है। ट्रंप द्वारा टैरिफ को कुल 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा को निवेशकों के लिए राहत माना जा रहा है।

दो प्रमुख उद्योग संगठनों ने भी इस समझौते का स्वागत किया है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष राजीव मेमानी ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को 18 प्रतिशत तक कम करना दोनों देशों के रणनीतिक आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

वहीं भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) के अध्यक्ष अनंत गोयनका ने कहा कि भारतीय उत्पादों पर पारस्परिक टैरिफ में कमी से दुनिया के सबसे बड़े आयात बाजार में भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।

 

With inputs from IANS