अमेरिका–ईरान युद्ध से ब्रेंट कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकता हैBy Admin Sun, 01 March 2026 07:36 PM

नई दिल्ली — एक रिपोर्ट के मुताबिक, यदि स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ में आपूर्ति बाधित होती है तो ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती है, जबकि व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की स्थिति में यह 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी पार कर सकती है।

JM Financial Institutional Securities की रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रेंट क्रूड पहले ही करीब 72.8 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका है। सीमित जवाबी कार्रवाई से कीमतों में 5–10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि ईरान के तेल बुनियादी ढांचे को सीधे नुकसान होने की स्थिति में 10–12 डॉलर प्रति बैरल तक उछाल संभव है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमत में हर 1 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत के वार्षिक आयात बिल पर लगभग 2 अरब डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ता है, जिससे व्यापार संतुलन पर दबाव बढ़ता है।

दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल प्रवाह का रास्ता स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ से होकर गुजरता है, जबकि भारत के कुल कच्चे तेल आयात का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इसी मार्ग पर निर्भर है।

ब्रोकरेज का मानना है कि निकट भविष्य में बाज़ारों का फोकस आय-आधारित कारोबार से हटकर तेल-आधारित ट्रेडिंग की ओर जा सकता है। अपस्ट्रीम ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र को अपेक्षाकृत समर्थन मिल सकता है, जबकि तेल-संवेदनशील सेक्टर जैसे ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs), पेंट्स, टायर, एविएशन और केमिकल्स पर मार्जिन का दबाव बढ़ सकता है। मौजूदा तनाव के परिदृश्य में कच्चा तेल भारतीय शेयर बाज़ार के लिए प्रमुख मैक्रो फैक्टर बना रहेगा।

रिपोर्ट में कहा गया, “रुपये पर निकट अवधि में कमजोरी का दबाव रह सकता है, हालांकि विदेशी मुद्रा भंडार के ज़रिये भारतीय रिज़र्व बैंक के हस्तक्षेप की संभावना है। ट्रांसमिशन चैनल साफ है—ऊंचा कच्चा तेल महंगाई का जोखिम बढ़ाता है; बढ़ती महंगाई से बॉन्ड यील्ड ऊपर जाती है; और ऊंची यील्ड इक्विटी वैल्यूएशन पर दबाव डालती है।”

लंबे समय तक तनाव बने रहने से लॉजिस्टिक्स और मरीन इंश्योरेंस लागत बढ़ सकती है, खाड़ी क्षेत्र के शिपिंग रूट्स प्रभावित हो सकते हैं और व्यापार घाटे पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, अपस्ट्रीम तेल उत्पादक कंपनियां जैसे ONGC और Oil India बेहतर रियलाइज़ेशन से लाभान्वित हो सकती हैं, जबकि रक्षा क्षेत्र की कंपनियों जैसे HAL और BEL को सेंटीमेंट सपोर्ट मिल सकता है।

इस बीच, अमेरिका और इज़राइल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई तथा कई वरिष्ठ आईआरजीसी, खुफिया और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों के मारे जाने की खबर है। शनिवार को संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों, मिसाइल बुनियादी ढांचे और कमांड सेंटर्स पर समन्वित हमले किए, जिसके बाद ईरान ने मध्य-पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों से जवाब दिया।

 

With inputs from IANS