
नई दिल्ली। निर्यातकों के संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) ने शनिवार को कहा कि सरकार 1 अप्रैल से निर्यात सहायता योजना Remission of Duties and Taxes on Exported Products (RoDTEP) के तहत पूरे लाभ बहाल करने जा रही है।
यह कदम निर्यातकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि वे वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
FIEO के अनुसार, यह आश्वासन विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने निर्यातकों के साथ हुई बैठक में दिया।
FIEO के अध्यक्ष एस.सी. रल्हन ने बताया कि RoDTEP योजना के तहत वर्तमान में लागू कम दरें केवल 31 मार्च 2026 तक ही जारी रहेंगी।
उन्होंने कहा कि 1 अप्रैल से फिर से पूरी दरें लागू कर दी जाएंगी, जिससे लागत दबाव और वैश्विक बाजार में अनिश्चितता से जूझ रहे निर्यातकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि इस साल 23 फरवरी को सरकार ने कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों को छोड़कर अधिकांश वस्तुओं के लिए RoDTEP के तहत मिलने वाले शुल्क लाभ को आधा कर दिया था।
इस फैसले से निर्यातक निराश हुए थे और उन्होंने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की थी।
वर्ष 2021 में शुरू की गई RoDTEP योजना के तहत निर्यातकों को उन कुछ करों, शुल्कों और लेवी का रिफंड दिया जाता है, जो वस्तुओं के निर्माण और वितरण के दौरान लगते हैं, लेकिन जिन्हें केंद्र, राज्य या स्थानीय स्तर की अन्य व्यवस्थाओं के तहत वापस नहीं किया जाता।
इस योजना के तहत रिफंड आमतौर पर निर्यात मूल्य का लगभग 0.3 प्रतिशत से 3.9 प्रतिशत तक होता है।
यह योजना पहले की Merchandise Exports from India Scheme (MEIS) की जगह लाई गई थी, ताकि विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
इसका उद्देश्य कर भार कम करके वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना है।
योजना के तहत निर्यातकों को निर्यात के समय शिपिंग बिल दाखिल करते हुए लाभ लेने की अपनी मंशा घोषित करनी होती है।
निर्यात प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिफंड ट्रांसफरेबल इलेक्ट्रॉनिक स्क्रिप्स के रूप में जारी किया जाता है, जिनका उपयोग सरकार के ICEGATE पोर्टल के जरिए कस्टम ड्यूटी का भुगतान करने में किया जा सकता है।
With inputs from IANS