
नई दिल्ली: भारत में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर तेजी से विस्तार की ओर बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में देश डेटा सेंटर हब के रूप में उभर सकता है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की डेटा सेंटर क्षमता वर्ष 2030 तक 4 से 8 गीगावॉट तक पहुंच सकती है, जबकि देश के 90 शहर भविष्य में डेटा सेंटर विकास के लिए उपयुक्त माने गए हैं।
इस रिपोर्ट का विमोचन केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री Jitin Prasada ने किया। उन्होंने कहा कि भारत का डेटा सेंटर इकोसिस्टम अब केवल तकनीकी ढांचा नहीं, बल्कि देश की आर्थिक और डिजिटल महत्वाकांक्षाओं से जुड़ा रणनीतिक राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर बनता जा रहा है।
उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और 6G जैसी भविष्य की तकनीकों के बढ़ते उपयोग से डेटा सेंटर की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि डेटा सेंटर विस्तार के लिए बिजली आपूर्ति, जल-संरक्षण आधारित कूलिंग सिस्टम और समन्वित नीतिगत हस्तक्षेपों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। साथ ही, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग को दीर्घकालिक स्थिरता और टिकाऊ विकास से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है।
NFPRC Foundation के चेयरपर्सन Tarun Chugh ने कहा कि डेटा सेंटर अब राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर का अहम स्तंभ बन चुके हैं और यह रणनीतिक आत्मनिर्भरता का भी महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
उन्होंने कहा कि DigiLocker और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी पहलों के कारण भारत में डिजिटल ट्रांजैक्शन और ऑनलाइन सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिसके लिए मजबूत बैकएंड इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है।
राज्यसभा सांसद Sujeet Kumar ने कहा कि भारत तेजी से मल्टी-गीगावॉट डेटा सेंटर अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि एआई वर्कलोड, क्लाउड सेवाएं, वित्तीय सेवाएं और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में हर साल अरबों डिजिटल ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए जाते हैं और रोजाना करीब 7 करोड़ UPI लेनदेन हो रहे हैं, जिससे डेटा सेंटर की अहमियत लगातार बढ़ती जा रही है।
With inputs from IANS