भारत के रिटेल बाजार में विदेशी ब्रांड्स की बढ़ी दिलचस्पी, जनवरी-मार्च में 31 लाख वर्गफुट लीजिंग दर्जBy Admin Tue, 12 May 2026 01:25 PM

मुंबई: भारत का रिटेल सेक्टर साल 2026 की पहली तिमाही में भी मजबूत बना रहा। जनवरी से मार्च के बीच देश के सात प्रमुख शहरों में कुल 31 लाख वर्गफुट रिटेल स्पेस की लीजिंग दर्ज की गई। एक नई रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, तिमाही आधार पर लीजिंग में 15 प्रतिशत की गिरावट जरूर दर्ज की गई, लेकिन सालाना आधार पर इसमें 1 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी हुई है। इससे साफ है कि रिटेल बाजार में मांग अब भी बनी हुई है।

रियल एस्टेट कंसल्टेंसी कंपनी JLL की रिपोर्ट के अनुसार, इस गिरावट की मुख्य वजह बड़े और उच्च गुणवत्ता वाले नए मॉल्स की सीमित आपूर्ति रही। गौरतलब है कि 2025 की चौथी तिमाही में करीब 25 लाख वर्गफुट नए मॉल स्पेस बाजार में आए थे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स भारत के उपभोक्ता बाजार को लेकर काफी उत्साहित हैं। विदेशी रिटेल ब्रांड्स की लीजिंग गतिविधियों में सालाना आधार पर 48 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसका प्रमुख कारण भारत का तेजी से बढ़ता मध्यम वर्ग और मजबूत घरेलू खपत है।

JLL इंडिया के ऑफिस लीजिंग और रिटेल सर्विसेज प्रमुख राहुल अरोड़ा ने कहा कि बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहरों में रिटेलर्स हाई स्ट्रीट लोकेशंस की ओर बढ़ रहे हैं, जबकि दिल्ली-एनसीआर और हैदराबाद में मॉल आधारित विस्तार जारी है। उनके मुताबिक, मौजूदा दौर में सफल विस्तार के लिए मल्टी-फॉर्मेट रणनीति जरूरी हो गई है, जिसमें मॉल्स और स्ट्रीट-लेवल दोनों तरह के लोकेशंस का संतुलन अहम है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक देश में लगभग 4.61 करोड़ वर्गफुट संस्थागत गुणवत्ता वाले रिटेल स्पेस की पाइपलाइन तैयार है। लगातार बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति के बीच भारत में रिटेल रियल एस्टेट के नए विस्तार चक्र की नींव मजबूत होती दिख रही है।

साल 2025 भारतीय रिटेल सेक्टर के लिए बेहद अहम रहा। इस दौरान रिटेल लीजिंग ने पिछले तीन वर्षों का रिकॉर्ड स्तर छुआ। कुल 1.25 करोड़ वर्गफुट लीजिंग दर्ज की गई, जो सालाना आधार पर 54 प्रतिशत अधिक थी। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि 2026 में भी इसी तरह की मजबूत मांग बनी रह सकती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि D2C ब्रांड्स, वैल्यू फैशन, ऑटोमोबाइल कंपनियों और फूड एंड बेवरेज सेक्टर की विस्तार योजनाओं ने रिटेल स्पेस की मांग बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

इसके अलावा सेकेंडरी मार्केट्स का योगदान भी उल्लेखनीय रहा। Kolkata ने कुल बाजार हिस्सेदारी में 10 प्रतिशत योगदान दिया, जहां नए शुरू हुए रिटेल प्रोजेक्ट्स में अच्छी मांग देखने को मिली।

 

With inputs from IANS