यूरोपीय देशों के साथ भारत का नया व्यापार समझौता बना बड़ा आर्थिक दांवBy Admin Sun, 17 May 2026 04:39 PM

नई दिल्ली। भारत और European Free Trade Association (EFTA) के बीच हुआ ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA) अब भारत की आर्थिक कूटनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। 1 अक्टूबर 2025 से लागू यह समझौता भारत और यूरोप के बीच रणनीतिक तथा आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है।

ग्रीस के समाचार पोर्टल GeoPolitico में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, यह समझौता दिखाता है कि भारत अब वैश्विक स्तर पर एक आत्मविश्वासी आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है, जो संतुलित, भविष्य-केंद्रित और निवेश आधारित व्यापार समझौते करने में सक्षम है।

EFTA समूह में यूरोप के चार विकसित देश — Switzerland, Norway, Iceland और Liechtenstein शामिल हैं। ये देश यूरोपीय संघ का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन तकनीक, उद्योग, नवाचार और वित्तीय क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में गिने जाते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, TEPA भारत का किसी विकसित यूरोपीय समूह के साथ पहला व्यापक मुक्त व्यापार समझौता है। इसलिए इसकी अहमियत सिर्फ टैरिफ में छूट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत को यूरोप के समृद्ध बाजारों तक पहुंच देने के साथ-साथ तकनीक, निवेश, हरित विकास, उन्नत विनिर्माण और नवाचार आधारित उद्योगों में सहयोग के नए अवसर भी खोलता है।

समझौते के तहत अगले 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर के निवेश और करीब 10 लाख रोजगार सृजित होने का लक्ष्य रखा गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों पक्षों के बीच व्यापार 24.4 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जबकि भारत के लगभग 99.6 प्रतिशत निर्यात को टैरिफ रियायतों का लाभ मिलेगा।

लेख में यह भी कहा गया कि TEPA ऐसे समय में लागू हुआ है, जब दुनिया भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन संकट और बदलते व्यापारिक समीकरणों का सामना कर रही है। अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा, रूस-यूरोप तनाव और एक ही बाजार पर अत्यधिक निर्भरता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच यह समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भरोसे का संकेत माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत की उस रणनीति को मजबूत करता है, जिसके तहत वह अपने व्यापारिक साझेदारों का दायरा बढ़ाकर खुद को स्थिर, भरोसेमंद और नियम-आधारित निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करना चाहता है।

 

With inputs from IANS