2037 तक शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर 80 लाख करोड़ रुपये निवेश की जरूरत: रिपोर्टBy Admin Fri, 15 May 2026 01:53 PM

नई दिल्ली: भारत को तेजी से बढ़ते शहरीकरण और आर्थिक विकास की जरूरतों को पूरा करने के लिए वर्ष 2037 तक शहरी बुनियादी ढांचे पर लगभग 80 लाख करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता होगी। यह जानकारी शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में सामने आई।

Brickwork Ratings की रिपोर्ट के अनुसार, 2036 तक देश के शहरी क्षेत्र भारत की जीडीपी में लगभग 70 प्रतिशत योगदान देंगे। ऐसे में टिकाऊ शहरी वित्त व्यवस्था राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र सरकार की 1 लाख करोड़ रुपये की Urban Challenge Fund (यूसीएफ) योजना भारत के शहरी विकास वित्त मॉडल में बड़ा बदलाव दर्शाती है। यह पारंपरिक अनुदान-आधारित व्यवस्था से हटकर बाजार आधारित मॉडल की ओर बढ़ने का प्रयास है, जिसके जरिए अगले पांच वर्षों में करीब 4 लाख करोड़ रुपये का कुल शहरी निवेश जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके तहत शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को केंद्र से वित्तीय सहायता मिलने से पहले कम से कम 50 प्रतिशत परियोजना फंडिंग खुद जुटानी होगी। इसके लिए उन्हें म्युनिसिपल बॉन्ड, बैंक ऋण या पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) का सहारा लेना होगा।

रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार परियोजना लागत का 25 प्रतिशत योगदान देगी, जबकि बाकी राशि राज्यों और शहरी निकायों द्वारा जुटाई जाएगी।

इस मॉडल का उद्देश्य वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और क्रेडिट योग्यता को मजबूत करना है। हालांकि, Brickwork Ratings ने इसके क्रियान्वयन में कई चुनौतियों और जोखिमों की भी आशंका जताई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बाजार से फंड जुटाने के लिए शहरी निकायों की क्रेडिट रेटिंग बेहद महत्वपूर्ण होगी। हालांकि बैंक ऋण के लिए औपचारिक रेटिंग जरूरी नहीं होती, लेकिन केवल संस्थागत ऋण पर निर्भरता शहरों को राज्य गारंटी पर आश्रित बनाए रखेगी और निवेश के विकल्प सीमित करेगी।

Manu Sehgal ने कहा, “अर्बन चैलेंज फंड भारत के म्युनिसिपल फाइनेंस इकोसिस्टम को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है, खासकर म्युनिसिपल बॉन्ड मार्केट में भागीदारी बढ़ाने के जरिए।”

उन्होंने बताया कि FY18 के बाद से अब तक केवल 17 शहरों ने म्युनिसिपल बॉन्ड जारी किए हैं, जिनकी कुल राशि करीब 45.4 अरब रुपये रही है। इससे इस क्षेत्र में मौजूद विशाल संभावनाओं का पता चलता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि निवेशकों का भरोसा म्युनिसिपल बॉन्ड्स में लगातार बढ़ा है। इसका संकेत यील्ड स्प्रेड में भारी गिरावट से मिलता है, जो FY20 में लगभग 480 बेसिस पॉइंट था और FY26 में घटकर करीब 155 बेसिस पॉइंट रह गया।

मनु सहगल ने कहा कि यूसीएफ के तहत 5,000 करोड़ रुपये की क्रेडिट रिपेमेंट गारंटी योजना छोटे शहरी निकायों के लिए पहली बार लिए जाने वाले ऋण पर गारंटी देकर निवेशकों का भरोसा बढ़ा सकती है। इससे बैंकों और निवेशकों के लिए निवेश के नए अवसर खुलेंगे।

 

With inputs from IANS