
वैश्विक कच्चे तेल बाजार में सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई, क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते को लेकर अनिश्चितता फिर बढ़ गई है।
ब्रेंट क्रूड करीब 0.94% बढ़कर लगभग 103.5 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क WTI क्रूड 0.26% बढ़कर 96.60 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। इससे पिछले सत्र में आई गिरावट की आंशिक भरपाई हुई है।
सूत्रों के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया कि वह अमेरिका के साथ किसी जल्द होने वाले समझौते को लेकर आश्वस्त नहीं है। इस बयान ने बाजार में बनी शुरुआती उम्मीदों को कमजोर कर दिया।
वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने कहा कि बातचीत में “कुछ सकारात्मक संकेत” जरूर हैं, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आवाजाही बाधित करने की कोशिश की, तो यह अमेरिका की “रेड लाइन” होगी।
विश्लेषकों के अनुसार, दोनों पक्षों से मिल रहे मिश्रित संकेतों के कारण निवेशक सतर्क हो गए हैं और ठोस परिणाम के बिना बाजार में किसी भी तेजी को लेकर भरोसा नहीं दिखा रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति अभी भी कसी हुई है, जबकि भंडार घट रहे हैं और ईंधन की ऊंची कीमतें महंगाई पर दबाव बढ़ा रही हैं।
भारत में भी हाल के दिनों में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई है। पेट्रोल की कीमत में ₹0.87 प्रति लीटर और डीजल में ₹0.91 प्रति लीटर की वृद्धि हुई है, जो लगभग 10 दिनों में तीसरी बढ़ोतरी है।
सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं है और सभी रिटेल आउटलेट्स पर पर्याप्त आपूर्ति जारी है।
ऊर्जा सुरक्षा भारत के लिए एक अहम मुद्दा बना हुआ है, क्योंकि देश के लगभग आधे कच्चे तेल और एलपीजी–एलएनजी आयात का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है।
With inputs from IANS