
नई दिल्ली: भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों या छूट (वेवर) से अलग अपनी ऊर्जा जरूरतों और व्यावसायिक हितों के आधार पर रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय की एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को कहा कि रूस से तेल खरीदने का फैसला पूरी तरह कारोबारी व्यवहार्यता और देश की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया जाता है।
पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव Sujata Sharma ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि भारत पहले भी रूस से तेल खरीदता था, अमेरिकी छूट के दौरान भी खरीदता रहा और आगे भी खरीद जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि इस फैसले पर किसी वेवर या उसके समाप्त होने का कोई असर नहीं पड़ेगा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के लिए सबसे अहम बात व्यावसायिक लाभ और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना है। उनके अनुसार देश में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है और लंबी अवधि के समझौतों के जरिए पर्याप्त आपूर्ति पहले से सुनिश्चित कर ली गई है।
रूसी समुद्री कच्चे तेल की बिक्री और डिलीवरी पर अमेरिकी अस्थायी छूट 16 मई को समाप्त हो गई। यह दूसरी बार है जब Donald Trump प्रशासन ने इस राहत अवधि को समाप्त होने दिया है, बिना आगे विस्तार पर स्पष्टता दिए।
यह सामान्य लाइसेंस अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने मार्च में जारी किया था और अप्रैल में बढ़ाया गया था। इसका उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा बाजार में दबाव कम करना और ईरान युद्ध के बीच बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित करना था।
भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, ने सस्ते दामों का फायदा उठाने के लिए रूस से तेल आयात में तेज बढ़ोतरी की थी। इससे घरेलू रिफाइनरियों को वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल से राहत मिली।
हाल के महीनों में अमेरिका ने रूस की कई संस्थाओं, जिनमें प्रमुख तेल कंपनियां Rosneft और Lukoil शामिल हैं, पर प्रतिबंध लगाए थे। इसके अलावा कुछ जहाजों और वित्तीय चैनलों पर भी कार्रवाई की गई थी। इससे कुछ समय के लिए भारतीय खरीद में कमी आई थी, लेकिन बाद में मिली छूट के कारण भारतीय रिफाइनरियों ने फिर खरीद बढ़ा दी।
डेटा फर्म Kpler के अनुसार, मई में भारत का रूसी तेल आयात लगभग 19 लाख बैरल प्रतिदिन के रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच सकता है। इसमें वे खेप भी शामिल हैं, जिन्हें अमेरिकी अस्थायी छूट के तहत भेजा गया था।
रूस से तेल खरीद ऐसे समय में जारी है जब वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद ने वैश्विक बाजार में मांग का दबाव कम कर कीमतों को नियंत्रित रखने में भी मदद की है।
विश्लेषकों का कहना है कि निकट भविष्य में भारत के रूसी तेल से दूर जाने की संभावना कम है। हालांकि, खरीद प्रक्रिया में दस्तावेजी जांच और निगरानी पहले से ज्यादा सख्त हो सकती है।
With inputs from IANS