एआई और 5G से रफ्तार पकड़ रहा भारत का डेटा सेंटर बाजार, 2033 तक 45 अरब डॉलर पार करने का अनुमानBy Admin Mon, 25 May 2026 03:28 PM

नई दिल्ली। भारत का डेटा सेंटर सेक्टर तेजी से विस्तार के दौर में प्रवेश कर चुका है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, देश का डेटा सेंटर उद्योग वर्ष 2033 तक लगभग 45.69 अरब डॉलर के राजस्व तक पहुंच सकता है।

KPMG की भारत इकाई की रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित वर्कलोड, क्लाउड सेवाओं का बढ़ता इस्तेमाल, 5जी नेटवर्क का विस्तार और डेटा लोकलाइजेशन नियम इस क्षेत्र की तेज वृद्धि के प्रमुख कारण बन रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, एआई-ऑप्टिमाइज्ड डेटा सेंटर मार्केट, जिसकी कीमत 2024 में करीब 588.6 मिलियन डॉलर आंकी गई थी, वह 2030 तक बढ़कर लगभग 3.55 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। इस दौरान इसमें करीब 35.1 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर रहने का अनुमान है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अब सबसे बड़ी चुनौती मांग की कमी नहीं, बल्कि ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण है जो बड़े पैमाने पर काम करने के साथ-साथ नियमों के अनुरूप और तकनीकी रूप से सक्षम भी हो।

विशेषज्ञों के अनुसार, पारंपरिक एयर-कूलिंग सिस्टम वाले डेटा सेंटर अब एआई आधारित भारी GPU वर्कलोड के लिए पर्याप्त नहीं रह गए हैं। नई पीढ़ी के एआई-रेडी डेटा सेंटर के लिए लिक्विड कूलिंग और हाई-डेंसिटी पावर डिस्ट्रीब्यूशन जैसी आधुनिक तकनीकों की जरूरत पड़ रही है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि Digital Personal Data Protection Act 2023 के लागू होने के बाद देश में लोकल डेटा स्टोरेज और नियमों के अनुरूप डेटा प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग और तेजी से बढ़ी है।

KG Purushothaman ने कहा, “भारत का डेटा सेंटर उद्योग एआई आधारित वर्कलोड, क्लाउड एडॉप्शन और डेटा लोकलाइजेशन की बढ़ती जरूरतों के कारण तेजी से नए विकास चरण में प्रवेश कर रहा है।”

उन्होंने कहा कि भविष्य में बाजार को ऐसे एकीकृत मॉडल की जरूरत होगी, जो इंजीनियरिंग, एआई क्षमता, नियामकीय समझ और संचालन को एक साथ जोड़ सके, ताकि बड़े स्तर पर आधुनिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा सके।

रिपोर्ट के अनुसार, अब कंपनियां अलग-अलग सेवा प्रदाताओं की बजाय ऐसे पार्टनर मॉडल की ओर बढ़ रही हैं, जो प्लानिंग, निर्माण, संचालन और रखरखाव जैसी सभी सेवाएं एक ही ढांचे में उपलब्ध कराएं।

साथ ही, पर्यावरण और स्थिरता (ESG) से जुड़े पहलू भी निवेशकों के लिए अहम बनते जा रहे हैं। डेटा सेंटर ऑपरेटर अब नवीकरणीय ऊर्जा, बेहतर बिजली उपयोग और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

Unaise Urfi ने कहा, “भविष्य में केवल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसे प्रभावी ढंग से लागू करने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।”

 

With inputs from IANS