वैश्विक हालात में सुधार के बीच RBI फिलहाल नहीं बदलेगा रेपो रेट, 5.25% पर रहने की उम्मीदBy Admin Sun, 21 June 2026 01:33 PM







नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आगामी मौद्रिक नीति बैठकों में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रख सकता है। बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, अनिश्चितताओं में कमी आने से केंद्रीय बैंक को जल्दबाजी में ब्याज दरों में बदलाव करने की आवश्यकता नहीं होगी और वह आर्थिक आंकड़ों के आधार पर आगे का फैसला ले सकेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद वैश्विक बाजारों में ऊर्जा कीमतों को लेकर बनी अनिश्चितता काफी हद तक कम हुई है। इससे RBI को महंगाई और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े घरेलू संकेतकों पर अधिक ध्यान देने का अवसर मिलेगा।

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विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल मानसून की प्रगति, खाद्य महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों पर लगातार नजर बनाए रखेगा। इन कारकों के आधार पर ही भविष्य में ब्याज दरों को लेकर कोई निर्णय लिया जाएगा।

गौरतलब है कि जून में हुई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में RBI ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा था और अपनी तटस्थ (Neutral) नीति को भी जारी रखा। उस समय वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों को देखते हुए सतर्क रुख अपनाया गया था।

हालांकि, केंद्रीय बैंक ने अपने आर्थिक अनुमानों में कुछ बदलाव भी किए थे। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया गया, जबकि महंगाई का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया गया। इसके पीछे मौसम संबंधी जोखिम और खाद्य कीमतों में संभावित उतार-चढ़ाव को प्रमुख कारण बताया गया।

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रिपोर्ट के अनुसार, MPC की बैठक के कार्यवृत्त (Minutes) से स्पष्ट है कि सभी सदस्यों ने बढ़ती महंगाई के जोखिम और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता को स्वीकार किया। हालांकि, उनका यह भी मानना है कि फिलहाल मूलभूत महंगाई (Underlying Inflation) नियंत्रण में है और व्यापक स्तर पर कीमतों में तेज वृद्धि के संकेत नहीं हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जून की बैठक के बाद भी MPC का रुख तटस्थ से हल्का नरम (Neutral to Moderately Dovish) बना हुआ है। यानी फिलहाल RBI की ओर से सख्त मौद्रिक नीति अपनाने के संकेत नहीं मिल रहे हैं और आगे के फैसले पूरी तरह आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर रहेंगे।

 

With inputs from IANS

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