भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को मिली बड़ी मंजूरी, 1.25 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव पर वित्त मंत्रालय की सहमतिBy Admin Tue, 30 June 2026 03:35 PM

नई दिल्ली। भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण को नई गति देने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय की व्यय वित्त समिति (ईएफसी) ने भारत सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0 के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के पास भेजा जाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार, आईएसएम 2.0 के तहत प्रस्तावित बजट पहले चरण के 76,000 करोड़ रुपये की तुलना में काफी अधिक है। पहले चरण के तहत चिप निर्माण, असेंबली और डिजाइन से जुड़ी 10 सेमीकंडक्टर इकाइयों को मंजूरी दी गई थी।

नए मिशन के तहत सिर्फ चिप निर्माण ही नहीं, बल्कि पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। इसमें औद्योगिक गैस, विशेष रसायन, पूंजीगत उपकरण, एमएसएमई और सहायक उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे देश में सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी।

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सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक भारत अपनी घरेलू सेमीकंडक्टर जरूरतों का लगभग 75 प्रतिशत स्वयं पूरा कर सके। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र बनाने के लक्ष्य को भी बल मिलेगा।

नई योजना शुरू करने से पहले सरकार विभिन्न मंत्रालयों के साथ आवश्यक विचार-विमर्श कर चुकी है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय वित्त मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार कर रहा था, जो अब मिल गई है।

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की मांग और उत्पादन दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं। देश में इस समय 65 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ता हैं, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का वार्षिक उत्पादन लगभग 12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।

इसके साथ ही देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित प्रणालियों, डेटा सेंटरों और इलेक्ट्रिक वाहनों का तेजी से विस्तार हो रहा है, जिनके लिए बड़ी मात्रा में सेमीकंडक्टर चिप्स की आवश्यकता होती है। ऐसे में वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में भारत की मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत अब तक 10 सेमीकंडक्टर संयंत्रों को मंजूरी मिल चुकी है और इनका निर्माण कार्य तेजी से जारी है। गुजरात के साणंद में एक इकाई की पायलट उत्पादन लाइन शुरू हो चुकी है, जबकि अगले एक वर्ष के भीतर चार अन्य इकाइयों में भी उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।

इसके अलावा, वैश्विक कंपनियां जैसे Applied Materials, Lam Research, Merck और Linde भी भारत में सहायक उद्योगों और सप्लाई चेन के विकास में निवेश कर रही हैं।

 

With inputs from IANS