

नई दिल्ली। कारोबार को आसान बनाने और अनावश्यक कानूनी कार्रवाई कम करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उपभोक्ता मामले विभाग ने लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम, 2009 के तहत 'इम्प्रूवमेंट नोटिस' (सुधार नोटिस) व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत पहली बार होने वाली कुछ प्रक्रियागत और नियामकीय चूकों को सुधारने का अवसर दिया जाएगा। यदि तय समय सीमा के भीतर त्रुटियों को ठीक कर लिया जाता है तो दंडात्मक कार्रवाई से बचा जा सकेगा।
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि यह सुधार जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) अधिनियम, 2026 के माध्यम से लागू किया गया है। इसका उद्देश्य 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (EoDB) को बढ़ावा देना, स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित करना और अनावश्यक मुकदमेबाजी को कम करना है।
नई व्यवस्था के तहत लीगल मेट्रोलॉजी अधिकारी पहली बार होने वाली निर्धारित प्रक्रियागत या नियामकीय चूक पर संबंधित कारोबारी इकाई को 'इम्प्रूवमेंट नोटिस' जारी कर सकेगा। नोटिस में कमी का स्पष्ट उल्लेख होगा और उसे दूर करने के लिए उचित समय दिया जाएगा। यदि कारोबारी तय अवधि में आवश्यक सुधार कर लेता है तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि बार-बार नियमों का उल्लंघन, सुधार नोटिस का पालन न करना, धोखाधड़ी, छेड़छाड़ या उपभोक्ता हितों को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम के तहत पहले की तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि 'इम्प्रूवमेंट नोटिस' व्यवस्था भरोसे पर आधारित सुशासन और कारोबार सुगमता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि इससे कारोबारियों को पहली बार हुई प्रक्रियागत और नियामकीय त्रुटियों को सुधारने का अवसर मिलेगा, जिससे स्वैच्छिक अनुपालन बढ़ेगा, मुकदमेबाजी कम होगी और अनुपालन का बोझ भी घटेगा। साथ ही धोखाधड़ी और बार-बार नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
सरकार के अनुसार, यह व्यवस्था एक पारदर्शी, पूर्वानुमेय और कारोबार-अनुकूल नियामकीय माहौल तैयार करने में मदद करेगी, जबकि उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

यह प्रावधान निर्माताओं, आयातकों, पैकर्स, डीलरों, मरम्मतकर्ताओं, व्यापारियों, एमएसएमई और लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम के दायरे में आने वाली अन्य सभी इकाइयों पर लागू होगा।
इस व्यवस्था में पंजीकरण संबंधी आवश्यकताएं, दस्तावेजों और रिकॉर्ड का रखरखाव, मॉडल अनुमोदन, बाट और माप के निर्माण, बिक्री एवं मरम्मत, इनके आयात, पैकेज्ड वस्तुओं तथा वैधानिक जानकारी और रिटर्न दाखिल करने जैसी पहली बार की प्रक्रियागत और नियामकीय चूक शामिल हैं।
उपभोक्ता मामले विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि यह नई व्यवस्था उपभोक्ता संरक्षण को कमजोर नहीं करती और न ही लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम के तहत लागू प्रवर्तन व्यवस्था को प्रभावित करती है। यह केवल पहली बार होने वाली निर्धारित प्रक्रियागत और नियामकीय त्रुटियों तक ही सीमित रहेगी।
मंत्रालय ने कहा कि 'इम्प्रूवमेंट नोटिस' व्यवस्था सरकार के 'मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस' के विजन को आगे बढ़ाती है। इससे ईमानदार कारोबारियों को नियमों का पालन करने में सहयोग मिलेगा, अनुपालन का अनावश्यक बोझ कम होगा और साथ ही लीगल मेट्रोलॉजी प्रणाली की विश्वसनीयता तथा उपभोक्ताओं के हित भी पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।
With inputs from IANS