

नई दिल्ली। साल 2026 की दूसरी छमाही में सोने-चांदी के बाजार की चाल पर टैक्स में संभावित बदलाव, कस्टम ड्यूटी में बढ़ोतरी और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों का सबसे अधिक असर देखने को मिल सकता है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, हालिया गिरावट के बाद भी बुलियन की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है और बाजार कुछ समय तक स्थिरता की ओर बढ़ सकता है।
All India Gem & Jewellery Domestic Council (जीजेसी) की रिपोर्ट के मुताबिक, ऊंची कीमतों के कारण आभूषणों की मांग फिलहाल कमजोर रह सकती है। हालांकि, त्योहारी सीजन और शादी-विवाह के मौसम में खासकर हल्के वजन वाले आभूषणों की बिक्री में सुधार आने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि उद्योग जगत को गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम में संभावित सुधार और टैक्स से जुड़े फैसलों का इंतजार है। वहीं, यदि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव फिर बढ़ता है तो निवेशक एक बार फिर सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर रुख कर सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में सोने और चांदी की कीमतों ने रिकॉर्ड स्तर छुआ, लेकिन बाद में इनमें आई गिरावट ने उपभोक्ताओं की सोच और बाजार की दिशा दोनों को प्रभावित किया। जनवरी 2026 में सोना 10 ग्राम के लिए 1,70,480 रुपये के उच्च स्तर तक पहुंचा था, जो जून के अंत तक घटकर करीब 1,42,800 रुपये रह गया। इसी तरह चांदी जनवरी में 4,02,490 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंची, जबकि जून के आखिर तक इसकी कीमत लगभग 2,25,940 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कीमतों में इस उतार-चढ़ाव के दौरान निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के रूप में सोना खरीदा, लेकिन महंगे आभूषणों के कारण आम ग्राहकों की खरीदारी प्रभावित हुई। अब ग्राहक बजट और बदलते फैशन को ध्यान में रखते हुए हल्के वजन वाले आभूषणों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
जीजेसी ने बताया कि मई 2026 में कस्टम ड्यूटी बढ़ने से घरेलू बाजार में सोने की कीमतें और बढ़ीं, जिससे खुदरा बिक्री पर दबाव पड़ा। इसके अलावा जीएसटी का बोझ और अनुपालन संबंधी प्रक्रियाओं ने भी कारोबारियों के मुनाफे को प्रभावित किया है। परिषद ने इन नियमों को सरल और व्यावहारिक बनाने की आवश्यकता दोहराई है।
जीजेसी के अध्यक्ष Rajesh Rokde ने कहा कि आने वाले त्योहारी और शादी के सीजन से आभूषणों की मांग को मजबूत समर्थन मिलने की उम्मीद है, खासकर हल्के वजन वाले उत्पादों की बिक्री बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि भारतीयों का सोने के प्रति भावनात्मक जुड़ाव बाजार को मजबूती देता है और इसी कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद यह क्षेत्र स्थिर बना रहेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद बाजार अब नए संतुलन की ओर बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय वायदा बाजार में कीमतों में कुछ नरमी आई है, लेकिन खुदरा बाजार में सोना अब भी महंगा बना हुआ है। इसके पीछे मुनाफावसूली, अमेरिकी डॉलर की मजबूती, वैश्विक स्तर पर लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों की उम्मीद और भू-राजनीतिक तनाव कम होने से सुरक्षित निवेश की मांग में आई कमी जैसे प्रमुख कारण हैं।
With inputs from IANS