
नई दिल्ली। भारत की डेटा सेंटर क्षमता आने वाले वर्षों में तेज़ी से बढ़ने की उम्मीद है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, देश की स्थापित डेटा सेंटर क्षमता 2025 में करीब 1.5 गीगावाट (GW) से बढ़कर 2030 तक 6.5 गीगावाट तक पहुंच सकती है, यानी मौजूदा स्तर से चार गुना से भी अधिक।
रुबिक्स डेटा साइंसेज की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में भारत की डेटा सेंटर क्षमता करीब 375 मेगावाट थी, जो पांच वर्षों में बढ़कर 1.5 GW हो गई है। 2025 में भारत ने 387 मेगावाट नई आईटी क्षमता जोड़ी, जो 2024 में जुड़े 191 मेगावाट की तुलना में 103 प्रतिशत अधिक है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2025 तक डेटा सेंटरों की संख्या के मामले में भारत दुनिया में सातवें स्थान पर था। जनवरी 2026 तक मुंबई, हैदराबाद, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु और चेन्नई में स्थित 271 डेटा सेंटर देश की कुल क्षमता का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस क्षेत्र में फिलहाल करीब 90 अरब डॉलर की निवेश परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं। यह 2020 से 2024 के बीच हुए 13-15 अरब डॉलर के निवेश से लगभग छह गुना अधिक है। इस निवेश को अमेजन वेब सर्विसेज (AWS), माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी वैश्विक कंपनियों की बड़ी योजनाओं से बढ़ावा मिल रहा है।
सरकार का भी अनुमान है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, जिसमें डेटा सेंटर प्रमुख भूमिका निभाएंगे, आने वाले वर्षों में 200 अरब डॉलर तक के निवेश को आकर्षित कर सकता है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बिजली और पानी की उपलब्धता इस क्षेत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों के रूप में उभर रही है। अनुमान है कि डेटा सेंटरों की बिजली मांग मौजूदा 1 GW से बढ़कर 2031-32 तक 13.56 GW तक पहुंच सकती है।
डेटा सेंटर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने विशेष नीतियां लागू की हैं, ताकि इसका विस्तार सिर्फ बड़े महानगरों तक सीमित न रहे।
रिपोर्ट के अनुसार, डेटा सेंटर उद्योग अब भारत की डिजिटल और आर्थिक प्रगति का अहम संकेतक बनता जा रहा है। इसका प्रभाव तकनीक, रियल एस्टेट, ऊर्जा, वित्त, सरकारी नीतियों और सतत विकास जैसे कई क्षेत्रों पर दिखाई दे रहा है।
एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में संस्थागत निवेश का 40 प्रतिशत हिस्सा डेटा सेंटरों में गया, जिससे यह इस अवधि में दूसरा सबसे बड़ा निवेश आकर्षित करने वाला क्षेत्र बन गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल, क्लाउड सेवाओं के विस्तार और डेटा लोकलाइजेशन की बढ़ती जरूरतों के कारण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है।
With inputs from IANS
