पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से कच्चे तेल में उछाल, ब्रेंट 96 डॉलर प्रति बैरल के पारBy Admin Thu, 23 July 2026 01:08 PM

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच गुरुवार को वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमले की जिम्मेदारी लेने के बाद वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई, जिससे ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया।

अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 2.5 प्रतिशत यानी 2.42 डॉलर की बढ़त के साथ 96 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार करता दिखा। इससे एक दिन पहले ही यह छह सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था।

वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 2 प्रतिशत से अधिक यानी 1.84 डॉलर चढ़कर करीब 88 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता रहा।

हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने मिसाइलों और ड्रोन की मदद से **एन्सेलिया (Encelia)** और **लायला (Layla)** नाम के दो सऊदी तेल टैंकरों को निशाना बनाया। उनका आरोप है कि इन जहाजों ने उनके द्वारा लगाए गए समुद्री प्रतिबंध का उल्लंघन किया था।

इससे पहले ब्रिटेन की **यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO)** ने बताया था कि सऊदी अरब के अल-शुकैक क्षेत्र के पास लाल सागर में एक व्यावसायिक जहाज पर प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ, जिससे उसमें आग लग गई। हालांकि एजेंसी ने प्रभावित जहाज की पहचान सार्वजनिक नहीं की।

विशेषज्ञों के अनुसार, ये हमले लाल सागर में संचालित तेल टैंकरों पर पहली सीधी कार्रवाई माने जा रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। लाल सागर सऊदी अरब के लिए तेल निर्यात का एक महत्वपूर्ण मार्ग बन चुका है, क्योंकि इसके जरिए वह दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य से बचते हुए तेल भेज सकता है।

इन हमलों के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता और गहरा गई है। इसी वजह से ब्रेंट क्रूड की कीमतों में जारी तेजी को और बल मिला है। इस महीने अब तक ब्रेंट क्रूड में लगभग 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है तथा आपूर्ति प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच सकती हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि ब्रेंट क्रूड का 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचना भारत जैसे देशों के लिए चिंता का विषय है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई, आयात बिल और चालू खाते के संतुलन पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं।
 

With inputs from IANS