GST 2.0: टैक्स व्यवस्था के दूसरे दशक में इन छह सुधारों पर हो सकता है जोरBy IANS Sat, 29 August 2026 06:07 PM

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भारत की वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था अपने दसवें वर्ष में प्रवेश कर रही है और ऐसे में 57वीं GST परिषद की बैठक को अगले चरण के सुधारों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। अब चर्चा केवल टैक्स दरों को कम या ज्यादा करने तक सीमित रहने के बजाय कारोबारियों के लिए नियमों को आसान बनाने, मुकदमों को घटाने, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) को सुरक्षित करने और तकनीक के जरिए अनुपालन को अधिक पारदर्शी व भरोसेमंद बनाने पर केंद्रित हो सकती है।

Grant Thornton Bharat के पार्टनर और Tax Controversy Management Leader मनोज मिश्रा के अनुसार, GST के दूसरे दशक में सरकार का जोर केवल टैक्स बेस बढ़ाने के बजाय ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर होना चाहिए, जिसमें कारोबारियों को नियमों को लेकर अधिक निश्चितता मिले और अनावश्यक विवाद कम हों।

GST 2.0 के संभावित सुधारों को मोटे तौर पर छह प्रमुख क्षेत्रों में देखा जा सकता है।

1. GST मुकदमों में कमी

GST से जुड़े मुकदमे लंबे समय से कारोबारियों के लिए बड़ी चिंता बने हुए हैं। ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र से जुड़े Gameskraft मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह मुद्दा और महत्वपूर्ण हो गया है। ऑनलाइन गेमिंग, फैंटेसी स्पोर्ट्स और कैसीनो गतिविधियों को सट्टेबाजी और जुए की श्रेणी में रखने तथा 1 जुलाई 2017 से पूरे फेस वैल्यू पर GST लगाने के फैसले के बाद उद्योग पर करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये की मांग का अनुमान लगाया गया है।

इस फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिकाएं दायर की गई हैं। इस मामले ने GST व्यवस्था में पुराने कारोबार व्यवहार और बाद में बदलने वाली कानूनी व्याख्याओं के बीच संतुलन का सवाल भी खड़ा किया है।

मनोज मिश्रा के अनुसार, CGST Act की धारा 11A का इस्तेमाल ऐसे मामलों में टैक्स स्थिति को नियमित करने के लिए किया जा सकता है, जहां उद्योग में कोई व्यापारिक व्यवहार लंबे समय से आम तौर पर स्वीकार किया जाता रहा हो।

2. ईमानदार कारोबारियों के ITC की सुरक्षा

इनपुट टैक्स क्रेडिट GST व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है, लेकिन इसे लेकर कारोबारियों के सामने एक बड़ी समस्या है। कई मामलों में खरीदार का ITC इस बात से जुड़ जाता है कि उसके सप्लायर ने सरकार के पास टैक्स जमा किया है या नहीं।

दिक्कत यह है कि किसी ईमानदार खरीदार के पास अपने सप्लायर की पूरी टैक्स अनुपालन व्यवस्था को नियंत्रित करने का व्यावहारिक तरीका नहीं होता।

ऐसे में GST परिषद उन कारोबारियों के लिए कानूनी सुरक्षा या safe harbour पर विचार कर सकती है, जिनके पास वैध टैक्स इनवॉयस है, जिन्होंने वास्तव में सामान या सेवा प्राप्त की है, भुगतान बैंकिंग माध्यम से किया है और किसी तरह की मिलीभगत में शामिल नहीं हैं।

ऐसी व्यवस्था से ईमानदारी से कारोबार करने वाले करदाताओं को अनावश्यक विवादों से बचाया जा सकता है और GST के मूल उद्देश्य यानी निर्बाध ITC की व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।

3. Compensation Cess से जुड़े पुराने क्रेडिट पर स्पष्टता

Compensation Cess की व्यवस्था से बाहर निकलने के बाद पुराने टैक्स क्रेडिट को लेकर भी कारोबारियों को स्पष्टता की जरूरत है। 1 फरवरी 2026 से कुछ निर्धारित वस्तुओं पर Compensation Cess समाप्त करने की सिफारिश के बाद अब कंपनियां पहले की व्यवस्था के तहत जमा हुए क्रेडिट के भविष्य को लेकर स्पष्ट दिशा चाहती हैं।

GST परिषद इस बैठक में पुराने क्रेडिट और उससे जुड़े संक्रमणकालीन मामलों पर स्पष्ट नियम तय कर सकती है, जिससे कारोबारियों के लिए अनिश्चितता कम होगी।

4. पेट्रोलियम उत्पादों को GST के दायरे में लाने की दिशा में चर्चा

पेट्रोल, डीजल, Aviation Turbine Fuel (ATF) और प्राकृतिक गैस अभी GST व्यवस्था से बाहर हैं। इसका मतलब है कि इन उत्पादों पर अलग-अलग स्तरों पर कर लागू होते हैं और इसका असर परिवहन, लॉजिस्टिक्स और विनिर्माण की लागत पर भी पड़ता है।

पेट्रोलियम उत्पादों को GST में शामिल करने का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। यदि इस दिशा में कोई ठोस रास्ता निकलता है, तो इसका व्यापक असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। हालांकि राज्यों के राजस्व हितों को देखते हुए यह एक जटिल फैसला होगा।

5. ऐप आधारित सेवाओं के लिए टैक्स नियमों में स्पष्टता

डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से बदल रही है और इसके साथ GST के सामने नई चुनौतियां भी आ रही हैं। ऐप आधारित यात्री परिवहन सेवाओं पर CGST Act की धारा 9(5) के इस्तेमाल को लेकर कारोबारियों के बीच कुछ सवाल बने हुए हैं।

ऐप आधारित प्लेटफॉर्म के कारोबार मॉडल में यह तय करना हमेशा आसान नहीं होता कि वास्तविक सेवा प्रदाता कौन है और प्लेटफॉर्म की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।

GST परिषद प्लेटफॉर्म की वास्तविक भूमिका और उसके द्वारा किए जाने वाले नियंत्रण के स्तर के आधार पर एक स्पष्ट functional test तय करने पर विचार कर सकती है। इससे यह तय करने में भी मदद मिल सकती है कि किसी कंपनी को उन सभी राज्यों में अलग-अलग GST पंजीकरण लेना होगा जहां उसके ड्राइवर काम करते हैं या किसी केंद्रीकृत अनुपालन व्यवस्था की अनुमति दी जा सकती है।

6. तकनीक के जरिए आसान और अधिक भरोसेमंद अनुपालन

GST व्यवस्था के अगले चरण में तकनीक की भूमिका और बढ़ने की संभावना है। कारोबारियों की सबसे बड़ी अपेक्षाओं में से एक यह है कि रिटर्न, ITC, नोटिस और टैक्स विवादों से जुड़ी प्रक्रियाएं अधिक स्वचालित, पारदर्शी और अनुमानित हों।

डेटा के बेहतर इस्तेमाल से गलतियों की पहचान पहले ही की जा सकती है और ईमानदार करदाताओं को बार-बार जांच या नोटिस की प्रक्रिया से बचाया जा सकता है। इससे अधिकारियों के लिए भी जोखिम आधारित जांच पर ध्यान देना आसान होगा।

कुल मिलाकर, GST के दूसरे दशक में सुधारों की दिशा केवल राजस्व बढ़ाने तक सीमित नहीं रहने वाली है। कारोबारियों के लिए स्थिर नियम, ITC की सुरक्षा, पुराने मामलों का समाधान, कम मुकदमे और डिजिटल अनुपालन में स्पष्टता GST को अधिक भरोसेमंद और सरल टैक्स व्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

अगर 57वीं GST परिषद की बैठक इन मुद्दों पर ठोस फैसले लेती है, तो यह GST की शुरुआत के बाद दरों में बदलाव के साथ-साथ उसके प्रशासनिक और कानूनी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।