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ग्लोबल रेटिंग एजेंसी S&P ने भारत की दीर्घकालिक ‘BBB’ और अल्पकालिक ‘A-2’ सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को स्थिर आउटलुक के साथ बरकरार रखा है। एजेंसी के मुताबिक, नीतिगत स्थिरता और बुनियादी ढांचे में लगातार हो रहा भारी निवेश भारत की आर्थिक वृद्धि को आगे भी मजबूती देगा।
S&P ने कहा कि स्थिर आउटलुक अगले 24 महीनों में भारत की आर्थिक संभावनाओं को लेकर उसके भरोसे को दर्शाता है। स्थिर राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों के साथ बुनियादी ढांचे पर निवेश सरकार के ऊंचे कर्ज और ब्याज बोझ को नियंत्रित करने में मदद करेगा।
रेटिंग एजेंसी ने हालांकि कहा कि ऊंची ऊर्जा कीमतों और कृषि क्षेत्र के सामने मौजूद चुनौतियों के कारण चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि कुछ धीमी पड़ सकती है। S&P ने इस वित्त वर्ष के लिए 6.6 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान जताया है।
इसके बावजूद एजेंसी को अगले तीन वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि औसतन 7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2022 से वित्त वर्ष 2026 के बीच भारत की औसत वार्षिक वृद्धि दर 7.9 प्रतिशत रही है।
S&P ने कहा कि भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, मजबूत बाहरी वित्तीय स्थिति और स्थिर संस्थान उसकी क्रेडिट रेटिंग को सहारा देते हैं। हालांकि, सरकार की कमजोर राजकोषीय स्थिति, ऊंचा कर्ज और कम प्रति व्यक्ति GDP अभी भी प्रमुख चुनौतियां हैं।
एजेंसी ने कमजोर मानसून और महंगे कृषि इनपुट को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बताया है। कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में करीब 18 प्रतिशत योगदान देता है और लगभग 43 प्रतिशत कार्यबल को रोजगार देता है। हालांकि, सेवाओं, विनिर्माण और बुनियादी ढांचे की ओर बढ़ता आर्थिक विविधीकरण इन चुनौतियों के असर को कम कर सकता है।
S&P ने चेतावनी दी कि सार्वजनिक वित्त को मजबूत करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता कमजोर पड़ने या आर्थिक वृद्धि में संरचनात्मक रूप से बड़ी गिरावट आने पर रेटिंग घटाई जा सकती है।
वहीं, यदि राजकोषीय घाटे में उल्लेखनीय कमी आती है और सरकारी कर्ज में संरचनात्मक रूप से सालाना बदलाव GDP के 6 प्रतिशत से नीचे आता है, तो भारत की रेटिंग बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।
S&P के अनुसार, बुनियादी ढांचे में लगातार सार्वजनिक निवेश और राजकोषीय सुधार मिलकर भारत की विकास क्षमता को मजबूत कर सकते हैं और सार्वजनिक वित्त से जुड़ी कमजोरियों को कम करने में मदद करेंगे।
