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मारुति सुजुकी इंडिया के चेयरमैन आरसी भार्गव ने कहा है कि सरकार के GST 2.0 सुधारों ने न सिर्फ ऑटोमोबाइल उद्योग को बल्कि अर्थव्यवस्था के कई अन्य क्षेत्रों को भी नई गति दी है। उनके मुताबिक, पश्चिम एशिया संकट के प्रतिकूल असर के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था का मजबूत प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि हालिया सुधारों ने कारोबार और मांग को सहारा दिया है।
सोमवार को कंपनी की वार्षिक आम बैठक में शेयरधारकों को संबोधित करते हुए भार्गव ने कहा कि भारत का कार बाजार 2031 तक बढ़कर 6.1 से 6.3 करोड़ नहीं, बल्कि 61 से 63 लाख वाहनों तक पहुंच सकता है। खासतौर पर छोटी कारों की मांग में आने वाले वर्षों में तेज बढ़ोतरी की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों की तुलना में छोटे कारों का बाजार अब काफी तेज गति से बढ़ सकता है।
भार्गव के मुताबिक, पिछले साल सितंबर में घोषित GST दरों में कटौती ने ऑटो सेक्टर के लिए नई संभावनाएं पैदा की हैं। उन्होंने कहा कि देश में GST संग्रह भी अब तक के उच्च स्तर पर बना हुआ है, जबकि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव देखने को मिला है।
उन्होंने कहा कि अगर GST सुधार नहीं किए गए होते तो मुश्किल महीनों के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन शायद इतना मजबूत नहीं रहता। भार्गव ने GST बदलावों को ऐतिहासिक सुधार बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और सरकार के अन्य सदस्यों का आभार जताया।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से सुधारों की प्रक्रिया को और तेज करने की अपील की। भार्गव ने कहा कि कारोबार करना आसान बनाने, तकनीक के ज्यादा इस्तेमाल और प्रक्रियाओं को सरल करने पर लगातार काम किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, तकनीक के इस्तेमाल से भ्रष्टाचार और देरी को कम करने में मदद मिलती है।
भार्गव ने यह भी कहा कि अर्थव्यवस्था में जितनी तेजी से संपत्ति और कारोबार का विस्तार होगा, सरकार के राजस्व में भी उतनी ही तेजी से बढ़ोतरी होगी। इससे देश में विकास को अधिक व्यापक और समान बनाने में मदद मिल सकती है।
ऑटो सेक्टर में बढ़ती मांग को देखते हुए मारुति सुजुकी बड़े स्तर पर उत्पादन क्षमता बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी का अनुमान है कि 2031 तक भारतीय कार उद्योग का आकार 61 से 63 लाख यूनिट तक पहुंच सकता है। इसी संभावित मांग को पूरा करने के लिए कंपनी ने अगले कुछ वर्षों में उत्पादन क्षमता में बड़ा विस्तार करने की योजना बनाई है।
भार्गव के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक मारुति की उत्पादन क्षमता करीब 29 लाख यूनिट और वित्त वर्ष 2030-31 के अंत तक 36.5 लाख यूनिट तक पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि कंपनी का यह विस्तार भारत की आर्थिक विकास क्षमता को देखते हुए किया जा रहा है।
कंपनी ने अगले पांच वर्षों के लिए अपने पूंजीगत खर्च यानी कैपेक्स प्लान को बढ़ाकर 77,500 करोड़ रुपये कर दिया है। मारुति सुजुकी इंडिया के प्रबंध निदेशक और सीईओ हिसाशी ताकेउची ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 में ही कैपेक्स करीब 40 फीसदी बढ़ाकर लगभग 14,000 करोड़ रुपये करने की योजना है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह करीब 10,000 करोड़ रुपये था।
वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच कंपनी कुल 77,500 करोड़ रुपये का पूंजीगत निवेश करेगी। इसका उद्देश्य उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ भविष्य की मांग के लिए कंपनी को तैयार करना है।
हरियाणा के खरखौदा प्लांट में मारुति सुजुकी ने दो उत्पादन लाइनें पहले ही शुरू कर दी हैं और तीसरी लाइन पर काम चल रहा है। गुजरात के हंसलपुर प्लांट में 2.5 लाख यूनिट सालाना क्षमता वाली चौथी लाइन भी शुरू हो चुकी है। इससे वहां कुल उत्पादन क्षमता 10 लाख यूनिट तक पहुंच गई है। भार्गव ने इसे सुजुकी का दुनिया में सबसे बड़ा प्लांट बताया।
गुजरात के साणंद में कंपनी की नई साइट पर भी काम शुरू हो गया है। यहां कुल 10 लाख यूनिट की उत्पादन क्षमता विकसित करने की योजना है। इस परियोजना में करीब 35,000 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है।
कुल मिलाकर, मारुति सुजुकी का बढ़ता निवेश सिर्फ कंपनी की विस्तार रणनीति नहीं, बल्कि भारत के ऑटोमोबाइल बाजार में आने वाले वर्षों की मांग को लेकर उसके भरोसे को भी दर्शाता है। GST सुधारों से मांग को मिलने वाले संभावित प्रोत्साहन, बढ़ती आय और देश में वाहन स्वामित्व के विस्तार के बीच छोटी कारों से लेकर अन्य सेगमेंट तक बाजार के लिए नए अवसर बनने की उम्मीद है।