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भारत के विनिर्माण क्षेत्र में अगस्त में भी विस्तार जारी रहा, हालांकि मांग की रफ्तार में नरमी ने कंपनियों को खरीद और भंडार बढ़ाने के मामले में सतर्क कर दिया। HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI के अनुसार, अगस्त में विनिर्माण PMI 52.8 रहा। यह लगातार तीसरा महीना है जब सूचकांक में गिरावट दर्ज की गई है।
मौसमी प्रभावों से समायोजित यह सूचकांक नए ऑर्डर, उत्पादन, रोजगार, आपूर्तिकर्ताओं की डिलीवरी और खरीद के भंडार जैसे प्रमुख संकेतकों के आधार पर विनिर्माण क्षेत्र की स्थिति को दर्शाता है। 50 से ऊपर का आंकड़ा क्षेत्र में विस्तार और 50 से नीचे का आंकड़ा संकुचन को दर्शाता है।
HSBC की मुख्य भारतीय अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि अगस्त में भारत का अंतिम विनिर्माण PMI घटकर 52.8 पर आ गया और इसमें लगातार तीसरे महीने गिरावट हुई। हालांकि, क्षेत्र अभी भी विस्तार की स्थिति में बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि उत्पादन लागत का दबाव लगातार कम हुआ है। इसका असर कंपनियों की कीमत तय करने की रणनीति पर भी दिखाई दिया और निर्माताओं ने अपने उत्पादों की बिक्री कीमतों में पहले की तुलना में सीमित बढ़ोतरी की।
महंगाई के दबाव में राहत
सर्वे में शामिल कंपनियों में से सात प्रतिशत से भी कम ने बिक्री कीमतें बढ़ाईं। लागत दबाव कम होने और कुछ कंपनियों द्वारा ऑर्डर बनाए रखने की कोशिश के कारण कीमतों में बढ़ोतरी सीमित रही।
हालांकि मांग की स्थिति पहले की तुलना में कमजोर हुई, लेकिन कंपनियों का कारोबारी भरोसा मजबूत हुआ है। सर्वे में शामिल करीब 16 प्रतिशत कंपनियों ने अगले 12 महीनों में उत्पादन बढ़ने का अनुमान जताया। बाकी कंपनियों को मौजूदा स्तर पर ही उत्पादन बने रहने की उम्मीद है।
कारोबारी विश्वास मई के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा, हालांकि ऐतिहासिक औसत की तुलना में यह अब भी अपेक्षाकृत कमजोर रहा।
नए ऑर्डर की रफ्तार पांच साल में सबसे धीमी
सर्वे के मुताबिक तीन औद्योगिक समूहों में से दो में मांग के रुझान कमजोर हुए, जबकि उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र में स्थिति बेहतर रही।
कुल मिलाकर नए कारोबार में अच्छी बढ़ोतरी हुई, लेकिन इसकी रफ्तार करीब पांच वर्षों में सबसे धीमी रही। कंपनियों ने बाजार की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और कुछ उत्पादों के प्रति ग्राहकों की कमजोर रुचि को इसकी प्रमुख वजह बताया।
निर्यात ऑर्डर में भी बढ़ोतरी जारी रही। ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, चीन, स्पेन, थाईलैंड और अमेरिका जैसे बाजारों से भारतीय कंपनियों को नए निर्यात ऑर्डर मिले। हालांकि, जुलाई की तुलना में अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर में वृद्धि की गति धीमी रही।
उत्पादन मजबूत, लेकिन स्टॉक को लेकर सावधानी
मांग में नरमी के बावजूद भारतीय विनिर्माताओं का उत्पादन अगस्त में मजबूत गति से बढ़ता रहा। हालांकि, कंपनियों के इन्वेंटरी आंकड़ों से उनके सतर्क रुख का संकेत मिला।
तैयार माल का भंडार लगातार दूसरे महीने बढ़ा। कंपनियों ने इसका कारण उम्मीद से कम बिक्री को बताया। हालांकि, तैयार माल के स्टॉक में वृद्धि मध्यम रही और जुलाई के मुकाबले इसकी रफ्तार कम रही।
आर्थिक गतिविधियों के लिए विनिर्माण क्षेत्र को एक अहम संकेतक माना जाता है। ऐसे में अगस्त का PMI आंकड़ा यह संकेत देता है कि भारतीय उद्योग में विस्तार की स्थिति कायम है, लेकिन कमजोर होती मांग और धीमे नए ऑर्डर कंपनियों के लिए आगे की राह को चुनौतीपूर्ण बना सकते हैं। लागत दबाव में कमी और कारोबारी भरोसे में सुधार फिलहाल उद्योग के लिए राहत के संकेत जरूर हैं।