भारत का ई-कॉमर्स बाजार 2030 तक करीब तीन गुना बढ़कर 345 अरब डॉलर पहुंचने का अनुमानBy IANS Wed, 02 September 2026 03:33 PM

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भारत का ई-कॉमर्स क्षेत्र अगले चार वर्षों में तेज विस्तार के दौर से गुजर सकता है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, देश का ऑनलाइन कारोबार बाजार 2024 के 125 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक करीब 345 अरब डॉलर पहुंच सकता है। यानी छह वर्षों में इसके लगभग तीन गुना होने का अनुमान है।

शोध एवं परामर्श कंपनी इन्फिसम की ‘स्मार्ट ग्रोथ इन ए फास्ट मार्केट’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट को सार्वजनिक नीति से जुड़े थिंक टैंक एम्पावर इंडिया के सहयोग से तैयार किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का ई-कॉमर्स बाजार 2030 तक औसतन 18.4 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ सकता है। लोगों की बढ़ती खर्च करने की क्षमता, इंटरनेट की लगातार बढ़ती पहुंच और डिजिटल सेवाओं को तेजी से अपनाया जाना इस विस्तार के प्रमुख कारण होंगे।

ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन से खुदरा कारोबार की तस्वीर भी बदलने की उम्मीद है। 2030 तक भारत के कुल खुदरा खर्च में ऑनलाइन कारोबार की हिस्सेदारी 10 से 12 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, ई-कॉमर्स का देश की जीडीपी में योगदान भी करीब 2.5 प्रतिशत हो सकता है।

ऑनलाइन खरीदारी करने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत में ऑनलाइन खरीदारों की संख्या 42 से 44 करोड़ तक पहुंच सकती है। इससे भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते डिजिटल खुदरा बाजारों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

ई-कॉमर्स के भीतर क्विक कॉमर्स यानी कुछ ही समय में सामान की डिलीवरी करने वाली सेवाओं की भूमिका भी लगातार बढ़ने की संभावना है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2030 तक भारत का क्विक कॉमर्स बाजार 65 से 70 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। अगले पांच वर्षों में ऑनलाइन खुदरा कारोबार में होने वाली अतिरिक्त वृद्धि में इसकी हिस्सेदारी 45 से 50 प्रतिशत तक हो सकती है।

क्विक कॉमर्स के विस्तार के साथ डार्क स्टोर का नेटवर्क भी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। ये ऐसे छोटे वितरण केंद्र होते हैं जहां सामान ग्राहकों की ऑनलाइन डिलीवरी के लिए रखा जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इनकी संख्या 2025 में मौजूद 2,525 केंद्रों से बढ़कर 2030 तक करीब 7,500 हो सकती है।

हालांकि, क्विक कॉमर्स कंपनियों की प्राथमिकताओं में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। शुरुआती दौर में जहां कंपनियां अधिक से अधिक ग्राहकों को जोड़ने और तेजी से नए क्षेत्रों में विस्तार करने पर जोर दे रही थीं, वहीं अब उनका ध्यान कारोबार को टिकाऊ बनाने, परिचालन लागत और दक्षता सुधारने तथा लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी ढांचे में लंबे समय के निवेश पर बढ़ रहा है।

तकनीक, खासकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भी ई-कॉमर्स क्षेत्र के अगले चरण की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। रिपोर्ट का अनुमान है कि 2030 तक एआई और मशीन लर्निंग के इस्तेमाल से खुदरा क्षेत्र की उत्पादकता में 35 से 37 प्रतिशत तक सुधार हो सकता है।

नीति आयोग के फेलो डॉ. बद्री नारायणन गोपालकृष्णन ने क्विक कॉमर्स के बढ़ते महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इसे अब अस्थायी कारोबारी चलन के बजाय स्थायी बुनियादी ढांचे के रूप में देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि 2030 तक 65 से 70 अरब डॉलर के अनुमानित बाजार आकार के साथ क्विक कॉमर्स भारत के ऑनलाइन खुदरा कारोबार में होने वाली अतिरिक्त वृद्धि के 45 से 50 प्रतिशत हिस्से को आगे बढ़ा सकता है।

रिपोर्ट के ये अनुमान संकेत देते हैं कि आने वाले वर्षों में भारत में खरीदारी का तरीका ही नहीं, बल्कि सामान के भंडारण, वितरण और अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचाने का पूरा ढांचा भी तेजी से बदल सकता है। छोटे शहरों और कस्बों में इंटरनेट तथा डिजिटल भुगतान की बढ़ती पहुंच इस बदलाव को और गति दे सकती है।