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इंजीनियरिंग निर्यातकों के शीर्ष संगठन EEPC India ने रविवार को BRICS देशों से गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने और राष्ट्रीय मुद्राओं में सुगम एवं प्रभावी भुगतान व्यवस्था विकसित करने की अपील की। संगठन का कहना है कि इन कदमों से निर्यातकों के सामने आने वाली करीब 75 प्रतिशत समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।
EEPC India के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा कि व्यापार को आसान बनाने के लिए BRICS देशों के बीच गैर-टैरिफ बाधाओं पर साझा सहमति बनाना अब जरूरी हो गया है।
उन्होंने कहा, “निर्यातकों के सामने आने वाली करीब 75 प्रतिशत समस्याओं का समाधान गैर-टैरिफ बाधाओं को खत्म करने और अलग-अलग राष्ट्रीय मुद्राओं में सुचारु एवं प्रभावी भुगतान व्यवस्था बनाने से किया जा सकता है।”
चड्ढा ने कहा कि BRICS देशों को गैर-टैरिफ बाधाओं के संबंध में एक साझा समझौता करना चाहिए और मानकों का एक समान ढांचा तैयार करना चाहिए।
उन्होंने कहा, “हम BRICS देशों के बीच गैर-टैरिफ बाधाओं को लेकर एक साझा समझौता कर सकते हैं और कुछ समान मानकों पर सहमति बना सकते हैं। इस मुद्दे पर काफी समय से चर्चा हो रही है, लेकिन अब इसे लागू करने का समय आ गया है।”
उद्योग जगत के अनुसार, कई देशों में गैर-टैरिफ उपाय निर्यातकों पर शुल्क की तुलना में अधिक लागत का बोझ डालते हैं। अलग-अलग देशों के नियामकीय नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाना ऐसे में व्यापार को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
BRICS देशों की हिस्सेदारी वैश्विक व्यापार में करीब एक-चौथाई है। ऐसे में गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने और व्यापार प्रक्रियाओं को आसान बनाने से इस समूह के भीतर व्यापारिक गतिविधियों को और बढ़ावा मिल सकता है।
इसका सबसे बड़ा लाभ भारत के इंजीनियरिंग क्षेत्र को मिल सकता है, जो देश के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में शामिल है। उद्योग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, इंजीनियरिंग वस्तुओं का भारत के कुल वस्तु निर्यात में करीब 27 प्रतिशत योगदान है।
BRICS अर्थव्यवस्थाओं में ब्राजील, चीन, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के प्रमुख बाजारों में शामिल हैं। ऐसे में व्यापारिक नियमों में समानता और आसान भुगतान व्यवस्था भारतीय निर्यातकों के लिए इन बाजारों तक पहुंच को और सुगम बना सकती है।
हाल के आंकड़े भी इंजीनियरिंग निर्यात में मजबूती दिखाते हैं। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में प्रमुख व्यापार मार्गों पर जारी व्यवधानों के बावजूद जुलाई में भारत का इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़कर 12.24 अरब डॉलर हो गया।
जुलाई 2025 में इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात 10.40 अरब डॉलर रहा था।