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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को कंटेनर विनिर्माण प्रोत्साहन योजना (CMPS) को मंजूरी दे दी। इस योजना के तहत वित्त वर्ष 2039-40 तक 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका उद्देश्य देश में कंटेनर निर्माण को बढ़ावा देना, आयात पर निर्भरता घटाना और समुद्री परिवहन तथा लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की आपूर्ति शृंखला को मजबूत करना है।
सरकार के अनुसार, इस योजना से लगभग 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है। इससे कंटेनर निर्माण से जुड़े सहायक उद्योगों, जैसे कॉर्नर कास्टिंग, विशेष प्रकार के स्टील, लकड़ी के फ्रेम और पेंट उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
इस योजना के तहत भारत में कंटेनर निर्माण का एक प्रतिस्पर्धी और वैश्विक स्तर का इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके लिए नई विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने के साथ-साथ मौजूदा कारखानों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने में भी सहायता दी जाएगी। कंटेनर निर्माण योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई थी।
योजना के प्रमुख घटकों में ब्याज सब्सिडी सहायता (ISA) शामिल है, जिसके लिए 859 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके तहत नई विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने और मौजूदा इकाइयों की क्षमता बढ़ाने के लिए पात्र कंटेनर निर्माताओं द्वारा लिए गए सावधि पूंजी ऋण पर सालाना 3 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी दी जाएगी।
इसके अलावा, परिचालन व्यय सहायता (OEA) के लिए 8,891 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इस मद के तहत वैश्विक शिपिंग मानकों के अनुरूप निर्मित और पात्र निर्माताओं द्वारा बेचे गए कंटेनरों पर वित्तीय सहायता दी जाएगी। सरकार के मुताबिक, इससे घरेलू स्तर पर निर्मित कंटेनरों की लागत संबंधी प्रतिस्पर्धात्मक कमी दूर करने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी।
योजना का तीसरा घटक परीक्षण एवं प्रमाणन सहायता है, जिसके लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके तहत डायनेमिक लॉन्गिट्यूडिनल इम्पैक्ट टेस्टिंग जैसी सुविधाओं सहित साझा परीक्षण एवं प्रमाणन केंद्र स्थापित करने में सहायता दी जाएगी। इससे निर्मित कंटेनरों की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उनकी प्रमाणन प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल के अनुसार, इस योजना से भारत की वार्षिक कंटेनर विनिर्माण क्षमता मौजूदा स्तर से लगभग दस गुना बढ़कर 7.5 लाख टीईयू तक पहुंच सकती है। टीईयू यानी ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट, कंटेनर क्षमता मापने की एक मानक इकाई है, जो 20 फुट लंबे कंटेनर के बराबर होती है।
सरकार का मानना है कि घरेलू उत्पादन क्षमता में वृद्धि से भारत गुणवत्तापूर्ण शिपिंग कंटेनरों के वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में उभर सकता है। साथ ही, इससे देश की समुद्री परिवहन व्यवस्था और लॉजिस्टिक्स आपूर्ति शृंखला को बाहरी व्यवधानों से निपटने में मदद मिलेगी।