चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की समयसीमा 31 दिसंबर तक बढ़ी, त्योहारों में कीमतें नियंत्रित रखने की कोशिशBy IANS Fri, 23 October 2026 06:27 PM

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केंद्र सरकार ने त्योहारों के दौरान चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और घरेलू बाजार में कीमतों को काबू में रखने के लिए एक लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की समयसीमा दो महीने बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2026 कर दी है। यह आयात टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) व्यवस्था के तहत किया जा रहा है।

वित्त मंत्रालय ने 20 अगस्त को एक अधिसूचना जारी कर 31 अक्टूबर तक एक लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी थी। अब नई अधिसूचना के जरिए इसकी अंतिम तारीख 31 दिसंबर तक बढ़ा दी गई है।

अब तक लगभग 2.6 लाख टन कच्ची चीनी का आयात किया जा चुका है। हालांकि, घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में गिरावट के कारण आयात की गति धीमी रही है। सरकार की ओर से अतिरिक्त आयात की अनुमति देने की घोषणा के बाद बाजार में कीमतों पर दबाव पड़ा है।

सरकार का उद्देश्य जरूरत पड़ने पर आयात के जरिए घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाना और कीमतों में तेजी को रोकना है। आयात की अनुमति मिलने से बाजार में यह उम्मीद भी बनती है कि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त चीनी उपलब्ध हो सकेगी। इससे वास्तविक आयात खेपों के पहुंचने से पहले भी कीमतों पर दबाव कम हो सकता है, क्योंकि व्यापारी और उत्पादक घरेलू भंडार निकालने के लिए कीमतों में कटौती कर सकते हैं।

चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार ने इससे पहले भी कई कदम उठाए हैं। इनमें कारोबारियों के लिए चीनी के भंडारण की सीमा तय करना शामिल है, ताकि बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनी रहे और कीमतों में अनावश्यक उछाल को रोका जा सके।

उत्पादन अनुमान में कटौती से बढ़ी चिंता

विपणन वर्ष 2025-26 (अक्टूबर से सितंबर) के लिए देश में चीनी उत्पादन का अनुमान घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है। पहले इसके 343 लाख टन रहने का अनुमान था। इस तरह उत्पादन के अनुमान में 37 लाख टन की कमी आई है।

इसके मुकाबले देश में चीनी की सालाना मांग लगभग 280 से 285 लाख टन रहने का अनुमान है। उत्पादन और मांग के बीच सीमित अंतर को देखते हुए सरकार आपूर्ति की स्थिति पर नजर रख रही है। हालांकि, घरेलू बाजार में वास्तविक उपलब्धता का आकलन करते समय पिछले वर्षों के भंडार और अन्य आपूर्ति कारकों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

गन्ना किसानों और चीनी मिलों के मुद्दों की समीक्षा के लिए समिति गठित

इस बीच, सरकार ने इसी महीने गन्ना किसानों की मांगों और चीनी उद्योग से जुड़े मुद्दों की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है।

समिति गन्ने की खेती की लागत और अन्य प्रासंगिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए किसानों को मिलने वाले लाभकारी मूल्य में बढ़ोतरी की मांग पर विचार करेगी। इसके साथ ही चीनी उत्पादन की लागत, बाजार में मिलने वाली कीमत और चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति के आधार पर एक्स-मिल न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में संशोधन की मांग की भी समीक्षा की जाएगी।

समिति चीनी की रिकवरी यानी गन्ने से प्राप्त होने वाली चीनी की मात्रा की जांच और रिपोर्टिंग की मौजूदा व्यवस्था का भी आकलन करेगी। इसके तहत रिकवरी की पारदर्शी पुष्टि सुनिश्चित करने के उपायों के साथ-साथ चीनी मिलों में गन्ने की तौल की प्रक्रिया, वजन मापने वाले उपकरणों के कैलिब्रेशन, निरीक्षण और सत्यापन व्यवस्था की पर्याप्तता पर भी विचार किया जाएगा।

सरकार के सामने इस समय दोहरी चुनौती है—त्योहारों के दौरान उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर चीनी उपलब्ध कराना और साथ ही गन्ना किसानों तथा चीनी मिलों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखना। शुल्क-मुक्त आयात की समयसीमा बढ़ाना इसी दिशा में उठाया गया एक कदम है।